कार्तिक पूर्णिमा पर बनारस न जा सकें तो भी मिले समान पुण्य, श्रद्धा और भावना से करें दीपदान अपने शहर के जल स्रोत पर। देव दिवाली का पावन पर्व इस वर्ष 5 नवंबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के आशीर्वाद से स्वयं देवता गंगा तट पर दीप प्रज्वलित करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा की इस रात्रि में दीप प्रवाहित करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
बनारस न जा सकें तो करें यह उपाय
यदि आप किसी कारणवश वाराणसी या गंगा तट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया दीपदान किसी भी पवित्र जल स्रोत पर समान पुण्य प्रदान करता है।
घर के पास इस विधि से करें दीपदान
आप अपने शहर या गांव के किसी नदी, तालाब, झील या कुएं के किनारे दीपदान कर सकते हैं। सूर्यास्त के बाद मिट्टी या आटे के दीप में तिल का तेल या घी डालें। उसमें दो बातियां रखें — एक ईश्वर के प्रति कृतज्ञता के लिए और दूसरी आत्मशुद्धि के लिए।
शिव-विष्णु का ध्यान करें, करें संकल्प
दीपदान से पहले भगवान शिव और भगवान विष्णु का ध्यान करें। दीप जल में प्रवाहित करते समय यह संकल्प लें कि यह प्रकाश संसार में अंधकार मिटाकर शांति और ज्ञान फैलाए।
हर घर बने बनारस, हर दीप बने आस्था का प्रतीक
जो व्यक्ति सच्चे मन से देव दिवाली पर दीपदान करता है, उसे गंगा स्नान और वाराणसी के दीपोत्सव जितना ही पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए जहां भी हों, अपने घर या शहर के जल स्रोत को पवित्र बनाएं और दिव्यता का अनुभव करें।