
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के रूप में जाना जाता है, जो वर्ष की सबसे पवित्र एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और पुनः सृष्टि संचालन में सक्रिय होते हैं। यह दिन विवाह, मांगलिक कार्यों और नए शुभारंभों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
देव उठनी एकादशी 2025 की तारीख और मुहूर्त
2025 में देवउठनी एकादशी बुधवार, 26 नवंबर को मनाई जाएगी।
इस दिन विशेष पूजा, तुलसी विवाह और भगवान विष्णु की आराधना का महत्व होता है।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 25 नवंबर 2025 को शाम 06:32 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 26 नवंबर 2025 को शाम 04:25 बजे तक
पारण (व्रत खोलने) का समय: 27 नवंबर 2025 को प्रातः 06:45 से 08:58 बजे तक
चातुर्मास का समापन
देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास का समापन होता है। चातुर्मास वह अवधि होती है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन करते हैं। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, व्रत-उपवास आदि शुभ कार्यों पर रोक रहती है। जैसे ही देव उठते हैं, जीवन में फिर से मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाती है।
देवउठनी एकादशी की धार्मिक मान्यता
इस दिन भगवान विष्णु को विशेष रूप से शंख, चक्र, गदा और पद्म अर्पित कर पूजा की जाती है। तुलसी दल के बिना भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है। अनेक स्थानों पर तुलसी विवाह भी इसी दिन संपन्न होता है, जिसमें तुलसी माता का विवाह शालिग्राम (भगवान विष्णु) से किया जाता है।
महत्व और लाभ
देवउठनी एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है और माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु और लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।