अमेरिका, यूके, सिंगापुर, दुबई, कतर समेत दुनिया में कई जगह ऐसे एजुकेशन हब मौजूद हैं जहां यूनिवर्सिटी या कॉलेज की अपनी अलग आइडेंटिटी होते हुए भी वे सुविधाएं शेयर करते हैं। भारत भी अब दुनिया के इन बड़े देशों के साथ जाना जाएगा। देश में एजुकेशन सिटी का शेयर्ड कैंपस मॉडल के तहत निर्माण होगा। सरकार ने देश में इस एजुकेशन सिटी के लिये हरी झंडी दे दी है और प्लान पारित भी कर दिया है। आइए आपको बताते हैं कि हमारे देश में ये एजुकेशन सिटी कहां बनेगी, उससे क्या सुविधा होगी और कौनसी यूनिवर्सिटीज़ इसका हिस्सा रहेंगी।
यहां बनेगी एजुकेशन सिटी
दिल्ली सरकार द्वारा पारित प्लान में दिल्ली में एजुकेशन सिटी बनाने की योजना है। दिल्ली के नरेला क्षेत्र में विदेशों की तरह शेयर्ड कैंपस मॉडल बनाया जाएगा जिसके लिए सरकार कई तरह की साइंटिफिक स्टडीज़ और इंटरनेशनल मॉडल को स्टडी कर रही है। साथ ही सरकार कंसल्टेंट्स की भी सलाह ले रही है। हालांकि, लगभग अगले दो से तीन महीनों में ही सरकार द्वारा कोई विस्तृत मॉडल सामने आएगा।
वर्ल्ड क्लास एजुकेशन हब
दिल्ली के नरेला में वर्ल्ड क्लास एजुकेशन और इनोवेशन हब बनाने की तैयारी है। दिल्ली सरकार लगभग 160 एकड़ जमीन में इस हब के निर्माण के लिए आगे बढ़ रही है। नरेला में एजुकेशन हब बनाने के इस प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था जो अब 1300 करोड़ रुपये हो गया है। लगभग 452 करोड़ रुपये का पेमेंट सरकार द्वारा डीडीए को कर दिया गया है। ये एजुकेशन हब रोजगार के लिए भी कई बड़े अवसर खोल देगा।
शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि नरेला एजुकेशन सिटी को ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित कैंपस मॉडल बनाने का प्लान है। इस एजुकेशन सिटी में छात्रों को कई तरह की सुविधाएं देने की तैयारी है। साथ ही सरकार के प्लान के मुताबिक नरेला में दिल्ली ही समेत देशभर के छात्रों को क्वॉलिटी एजुकेशन मिलेगी। ऐसा करने से दिल्ली एजुकेशन फील्ड में एक मजबूत सेंटर बन पाएगा।
मिलेंगी ये सुविधाएं
सरकार द्वारा पारित प्लान में नरेला में बनने जा रही एजुकेशन सिटी में विद्धयार्थियों को कई खास सुविधाएं दी जाएंगी जिसमें रिसर्च-इनोवेशन सुविधाओं के अलावा ये सुविधा भी मिलेंगी-
क्वालिटी हायर एजुकेशन
मॉडर्न लाइब्रेरी और हाईटेक लैब्स
सेमिनार हॉल और ऑडिटोरियम आदि।
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ये यूनिवर्सिटी होंगी शामिल
1. दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DeTU)
2. दिल्ली स्किल एंड आंत्रप्रेन्योरशिप यूनिवर्सिटी (DSEU)
3. दिल्ली टेक्नलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU)
4. दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (DSPSRU)
5. गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी) (GGSIPU)
6. इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्नलॉजी यूनिवर्सिटी फॉर वुमंस (IGDTUW)
क्या है शेयर्ड कैंपस मॉडल?
नरेला के इस एजुकेशन हब को 'शेयर्ड कैंपस मॉडल' पर बनाए जाने का विचार है। विदेशों में भी यह मॉडल है जिसका सबसे बड़ा फायदा है कि इसमें ना स्पेस की कमी होती और साथ ही साथ पैसा की लागत भी कम होती है। 'शेयर्ड कैंपस मॉडल' के अनुसार यहां जितनी भी सरकारी यूनिवर्सिटी के कैंपस होंगे, वो सभी तरह की सुविधाएं शेयर करेंगे। नरेला एजुकेशन सिटी में सभी यूनिवर्सिटी कैंपस और सभी कैंपस के छात्र स्टेडियम से लेकर लाइब्रेरी तक सभी सुविधाएं शेयर करेंगे। साथ ही, फैकल्टी और स्टाफ के लिए रेजिडेंशल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे जो मॉडल के मुताबिक ही अलॉट होंगे।
मॉडल के फायदे
शेयर्ड कैंपस मॉडल के कई बड़े फायदे हैं। इससे खर्चा भी कम होता है, टीचर्स, स्टूडेंट्स, सटाफ फैकल्टी का वक्त भी बचता है और एक मजबूत एजुकेशन-रिसर्च इकोसिस्टम का निर्माण होता है। ऐसा करके जमीन को और बेहतर तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक मिनी शहर की तरह होता है जिसमें रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। इससे इंडस्ट्री कनेक्शन, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी, कई कोर्स और रिसर्च समेत को-करिकुलर एक्टिविटी के बड़े मौके भी एक ही जगह पर उपलबद्ध हो जाते हैं।
ट्रांजिट हब पॉलिसी
अर्बन एक्सटेंशन रोड़ (UER-1) और रिठाला – नरेला मेट्रो कॉरिडोर का काम चालू है जिससे नरेला एजुकेशन सिटी की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। नरेला की एजुकेशन सिटी को ट्रांजिट हब पॉलिसी से जोड़ा जाएगा जिससे कैंपस में मेट्रो और बस ट्रांसपोर्ट आदी सभी जरुरी अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर और फैसिलिटी दी जा सकेंगी।
कैंपस बनाने का प्लान
जानकारी के मुताबिक, एजुकेशन सिटी में शामिल इन यूनिवर्सिटीज़ के कैंपस बनाने का प्लान है। दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी को 12.69 एकड़ जमीन, इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी को 22.43 एकड़ जमीन और इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्नलॉजी यूनिवर्सिटी फॉर वुमंस को 50 एकड़ जमीन के पजेशन लेटर सौंपे जा चुके हैं। हालांकि इस कैंपस के नाम से आईपी कुछ कोर्स अपने द्वारका और ईस्ट कैंपस से शुरू भी कर चुकी है। फ्लैट्स, हॉस्टल और बाकी सुविधाओं के लिए भी लगभग 567 करोड़ रुपये का इन्वेस्टमेंट सरकार द्वारा प्रस्तावित है।