Sawan 2025 : सावन का पवित्र माह, जिसे भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है, इस वर्ष 11 जुलाई शुक्रवार से आरंभ हो रहा है. यह महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार सावन सोमवार का व्रत करने जा रहे हैं. श्रावण मास में शिव उपासना और व्रत का पालन कर शिव कृपा प्राप्त की जाती है.
व्रत की शुरुआत से पहले लें संकल्प
जो भक्त पहली बार व्रत की शुरुआत कर रहे हैं, उन्हें नियमपूर्वक व्रत का संकल्प लेना आवश्यक है. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव का स्मरण करते हुए "ॐ नमः शिवाय" मंत्र से दिन की शुरुआत करें. इसी मंत्र के साथ मन में व्रत का संकल्प लें कि पूरे सावन मास में श्रद्धा व नियमों का पालन करेंगे.
शुद्धता और संयम का रखें ध्यान
व्रत के दिन तन और मन दोनों की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है. घर और पूजा-स्थान की सफाई करें, भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को स्वच्छ करें. झूठ बोलने से बचें, किसी से विवाद या कटु वचन न कहें. मांस-मदिरा से दूरी बनाए रखें और संयमित आचरण अपनाएं. यह व्रत आत्मिक शुद्धि के साथ भक्ति को भी मजबूत करता है.
फलाहार और पूजन विधि
व्रती दिनभर फल, दूध और पानी का सेवन कर सकते हैं. कई लोग एक समय फलाहार करते हैं या निर्जल व्रत भी रखते हैं. अनाज और नमक का सेवन वर्जित होता है. पूजन में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें. बेलपत्र, धतूरा, आक, चंदन, भस्म और पुष्प चढ़ाएं. सावन सोमवार व्रत की पूर्णता तभी मानी जाती है जब व्रत कथा को सुना या पढ़ा जाए. यह न केवल धार्मिक दृष्टि से आवश्यक है, बल्कि यह भक्त की आस्था को भी मजबूती देता है. इस पावन श्रावण मास में नियमपूर्वक व्रत कर शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें और अपने जीवन को शुभता से भरें.