
नई दिल्ली: अक्टूबर 2025: कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि इसलिए विशेष है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, Devuthani Ekadashi 2025 को भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य संस्कारों के मुहूर्त पुनः शुरू हो जाते हैं।
Devuthani Ekadashi 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 का पर्व 9 नवंबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2025, रात्रि 9:45 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2025, रात्रि 8:10 बजे
पूजा और व्रत का शुभ मुहूर्त: 9 नवंबर की प्रातः 6:15 बजे से 8:30 बजे तक सबसे उत्तम रहेगा।
देवउठनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
देवउठनी एकादशी की पूजन विधि
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
तुलसी पत्र, पीले पुष्प और पंचामृत से विष्णु जी का अभिषेक करें।
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें और तुलसी विवाह की प्रतीकात्मक रस्म निभाएं।
शाम के समय दीपदान करें — इसे अत्यंत शुभ माना गया है।
विशेष परंपरा — तुलसी विवाह