
धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना से घर में धन संपदा बढ़ती है। साथ ही उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का भी आशीर्वाद मिलता है। ऐसे मेंआयुर्वेद के जनक को किस तरह प्रसन्न किया जा सकता है, चलिए जानते हैं। धनतेरस का पर्व सिर्फ धन-संपत्ति की वृद्धि के लिए ही नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का विशेष महत्व होता है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक और आरोग्य का देवता कहा गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति धनतेरस के दिन श्रद्धा से धन्वंतरि भगवान की पूजा करता है, उसे निरोगी काया और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
कब है धनतेरस 2025
धनतेरस से दिवाली का पांच दिवसीय त्योहार शुरू होता है। इस साल धनतेरस 18 अक्तूबर को मनाया जाने वाला है। इस दिन विशेष रूप से भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना से घर में धन संपदा बढ़ती है।
भगवान धन्वंतरि का महत्व
पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और औषधियों के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण उन्हें आयुर्वेद का जनक और स्वास्थ्य के देवता माना जाता है। धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने से रोगों से मुक्ति, मानसिक शांति और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन केवल सोना-चांदी खरीदने का नहीं, बल्कि अपने और परिवार के आरोग्य की प्रार्थना करने का दिन है।
धन्वंतरि पूजा की विधिवत विधि
प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि की पूजा करनी चाहिए। ये समय भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में सबसे पहले पूजा स्थान पर लाल या पीले वस्त्र का आसन बनाकर बिछाना चाहिए। फिर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र की स्थापना करनी चाहिए। दीपक जलाने से पहले नीचे चावल या नया धान रखना चाहिए। इसके बाद तांबे के कलश में जल भरकर उसे पूजा स्थल पर रखना चाहिए। फिर उसी जल से सभी देवी-देवताओं को आचमन कराना चाहिए. पूजा के दौरान भगवान को रोली, हल्दी, चावल, पुष्प, पान, श्रीफल और नैवेद्य चढ़ाना चाहिए। फिर भगवान धन्वंतरि से परिवार की आरोग्यता और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। पूजा के समय मंत्रों का जाप करना चाहिए।