Dhanteras 2026: दिवाली का त्योहार कई दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाले इस पर्व को धनत्रयोदशी भी कहते हैं। हिंदू धर्म में धनतेरस को सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से धनतेरस पर उनकी विशेष पूजा की जाती है। इस पर्व पर सिर्फ धन्वंतरि देव ही नहीं, बल्कि धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की आराधना भी की जाती है। साथ ही शाम को यमराज के नाम से घर के बाहर दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपक कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। आइए जानते हैं कि साल 2026 में धनतेरस कब मनाई जाएगी और पूजा के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा।
धनतेरस 2026 की तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस - 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
धनतेरस पूजा मुहूर्त - शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
प्रदोष काल - शाम 5:33 बजे से 8:09 बजे तक
वृषभ काल - शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
त्रयोदशी तिथि शुरू - 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त - 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ समय
धनतेरस के दिन नई चीजें खरीदना शुभ माना जाता है। इस मौके पर लोग सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और घर के काम आने वाली दूसरी वस्तुएं खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई चीजें घर में सुख-समृद्धि लेकर आती हैं। साल 2026 में खरीदारी के लिए शुभ समय 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर को सुबह 6:37 बजे तक बताया गया है।
धनतेरस पर खरीदारी के लिए चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 10:30 बजे से 10:43 बजे तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ): दोपहर 12:05 बजे से 1:27 बजे तक
अपराह्न मुहूर्त (चर): शाम 4:11 बजे से 5:33 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ): रात 8:49 बजे से 10:27 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): 7 नवंबर की रात 12:05 बजे से सुबह 4:59 बजे तक
धनतेरस पर कैसे करें पूजा?
धनतेरस के दिन घर की साफ-सफाई करने के बाद पूजा की तैयारी की जाती है। शाम के समय मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की विधि-विधान से आराधना की जाती है। पूजा के दौरान दीपक, फूल, धूप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इस दिन धातु की वस्तुएं खरीदने की भी परंपरा है। बहुत से लोग पीतल और चांदी के बर्तन घर लाते हैं। सोना खरीदना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर खरीदी गई धातु की वस्तुएं घर में बरकत और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। शाम ढलने के बाद घर के मुख्य दरवाजे और आंगन में दीप जलाए जाते हैं। इसी दौरान यमराज के नाम का एक दीपक भी जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इस परंपरा का पालन करने से परिवार के सदस्यों को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।
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धनतेरस क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसी घटना की याद में हर साल धनतेरस मनाई जाती है। इस दिन को धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस पर धन और समृद्धि की कामना के साथ स्वास्थ्य की मंगलकामना भी की जाती है। यही वजह है कि इस पर्व पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।