मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला–कमल मौला परिसर में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने से प्रशासन और श्रद्धालुओं दोनों के सामने चुनौती खड़ी हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तय समय-सारिणी के तहत शुक्रवार सुबह से पूजा शुरू हो चुकी है, जबकि दोपहर में नमाज़ होगी। भारी सुरक्षा व्यवस्था और कड़े नियमों के बीच पूरा आयोजन शांतिपूर्वक कराने पर जोर दिया जा रहा है।
सुबह से शुरू हुई पूजा, दोपहर में नमाज़
अदालत के आदेश के अनुसार हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति दी गई है, जबकि मुस्लिम समुदाय दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज़ अदा करेगा। नमाज़ के बाद लोगों को तुरंत परिसर खाली करना होगा। दोनों धार्मिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग स्थान और मार्ग तय किए गए हैं, ताकि किसी तरह की भीड़ या टकराव न हो।
किले जैसी सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 8,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की है। पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ की टुकड़ियों के साथ महिला इकाइयों को भी लगाया गया है। पूरे क्षेत्र पर 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से नजर रखी जा रही है। प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है और हर वाहन की सघन जांच हो रही है।
प्रवेश-निकास अलग, नामों की सूची पहले से तैयार
दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं। नमाज़ अदा करने वालों की सूची पहले ही प्रशासन को सौंप दी गई है, ताकि आवाजाही नियंत्रित रहे। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों ने तय व्यवस्था पर सहमति जताई है और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
मूल विवाद हाई कोर्ट के पास, ASI रिपोर्ट खुलेगी
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला से जुड़े मुख्य विवाद को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भेजते हुए तेजी से सुनवाई करने को कहा है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सीलबंद रिपोर्ट को खुली अदालत में खोला जाए और उसकी प्रतियां दोनों पक्षों को दी जाएं। इसके बाद आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समय मिलेगा। तब तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश है।
दो दशकों पुराना इंतज़ाम और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले 23 वर्षों से एक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज़ की अनुमति दी जाती रही है। भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है, जिसे परमार काल से जोड़ा जाता है। मुस्लिम पक्ष इसे सूफी संत कमालुद्दीन से जुड़ा मानता है, जबकि हिंदू पक्ष देवी सरस्वती के मंदिर का दावा करता है। पुरातात्विक सर्वे के बाद बहस और तेज हुई है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।