केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस्तीफे की जानकारी खुद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल नहीं था। उनके पद छोड़ते ही विपक्षी दलों और आंदोलन से जुड़े नेताओं ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए।
अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को आंदोलन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के सामने डरे बिना डटा जाए तो किसी भी मंत्री से इस्तीफा लिया जा सकता है। दीपके ने इसे केवल शुरुआत बताते हुए कहा कि "अभी सिर्फ पहला विकेट गिरा है" और आगे भी जवाबदेही तय कराई जाएगी।
सरकार और पुलिस पर निशाना
अभिजीत दीपके ने दावा किया कि कई नेताओं ने उन्हें पहले कहा था कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन आंदोलन ने यह धारणा बदल दी। उन्होंने जंतर-मंतर पर मौजूद पुलिसकर्मियों को भी चेतावनी भरे लहजे में संबोधित करते हुए कहा कि जब एक केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा हो सकता है तो बाकी लोग भी जवाबदेही से बच नहीं सकते।
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विपक्ष ने बताया जीत
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर युवाओं और आंदोलनकारियों को बधाई देते हुए इसे छात्र शक्ति की जीत बताया। वहीं सांसद संजय सिंह ने कहा कि करोड़ों युवाओं के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया और अब पेपर लीक से शुरू हुई लड़ाई रोजगार और जवाबदेही तक जाएगी।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह फैसला बहुत पहले लिया जा सकता था। उनके अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई होती तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मजबूरी में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक बहस जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के मुद्दों पर और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।