Dharmendrasinh Jadeja Selection : 36 वर्षीय बाएं हाथ के स्पिनर धर्मेंद्रसिंह जडेजा ने घरेलू क्रिकेट में शानदार आंकड़े दर्ज किए हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय सीनियर टीम में जगह नहीं बना सके। फर्स्ट क्लास, लिस्ट-ए और टी20 क्रिकेट को मिलाकर उनके नाम 609 विकेट हैं। लंबे समय से सौराष्ट्र के लिए खेलने वाले इस अनुभवी गेंदबाज ने लगातार विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की, लेकिन राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाए।
रणजी में लगातार बरसाए विकेट
धर्मेंद्रसिंह जडेजा का फर्स्ट क्लास रिकॉर्ड उनकी काबिलियत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। उन्होंने 100 मैचों में 26.25 की औसत से 423 विकेट लिए हैं। इस दौरान वह 26 बार पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट और सात बार मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं। रणजी ट्रॉफी में 2017-18 सीजन से अब तक उनके नाम 293 विकेट हैं, जो इस अवधि में किसी भी गेंदबाज से ज्यादा हैं।
तीनों फॉर्मेट में दिखाया दम
धर्मेंद्रसिंह का प्रदर्शन सिर्फ फर्स्ट क्लास क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 90 लिस्ट-ए मैचों में 121 विकेट और 73 टी20 मुकाबलों में 65 विकेट हासिल किए हैं। गेंदबाजी के साथ उन्होंने बल्ले से भी योगदान दिया है। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 2123 रन हैं, जिसमें सात अर्धशतक शामिल हैं। लिस्ट-ए में उन्होंने 566 और टी20 क्रिकेट में 208 रन बनाए हैं।
टीम इंडिया में क्यों नहीं मिली जगह
घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन के बावजूद धर्मेंद्रसिंह के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना आसान नहीं था। उनके करियर के दौरान भारत के पास रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव जैसे स्थापित स्पिन विकल्प मौजूद रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उनके शानदार घरेलू रिकॉर्ड के बावजूद राष्ट्रीय टीम का दरवाजा नहीं खुल सका।
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अब छत्तीसगढ़ से नई शुरुआत
नए घरेलू सीजन से पहले धर्मेंद्रसिंह जडेजा ने सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन से NOC ले लिया है और आगामी सीजन में छत्तीसगढ़ के लिए खेलने की उम्मीद है। सौराष्ट्र टीम मैनेजमेंट के साथ उनकी भूमिका को लेकर बातचीत भी हुई थी। टीम मैनेजमेंट चाहता था कि वह मुख्य रूप से रेड बॉल क्रिकेट पर ध्यान दें, जबकि धर्मेंद्रसिंह व्हाइट बॉल क्रिकेट में भी खेलना चाहते थे। अब नई टीम के साथ उनका नया अध्याय शुरू होगा, लेकिन 600 से ज्यादा विकेट के बावजूद टीम इंडिया से दूर रहने का सवाल अब भी बरकरार है।