भारत के तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने तुर्की के अंताल्या में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 3 में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सबसे पहले मिक्स्ड टीम इवेंट में कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर खेला। दोनों ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। फाइनल मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने दक्षिण कोरिया की मजबूत टीम को 5-1 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। यह जीत खास इसलिए भी रही क्योंकि सामने ओलंपिक चैंपियन खिलाड़ी भी मौजूद थे। इस जीत के साथ भारत ने मिश्रित टीम रिकर्व इवेंट में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की।
व्यक्तिगत फाइनल में गोल्ड जीत
मिक्स्ड टीम जीत के बाद धीरज ने व्यक्तिगत रिकर्व इवेंट में भी दमदार प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबला दक्षिण कोरिया के ओलंपिक कांस्य पदक विजेता ली वू-सियोक के खिलाफ था। मुकाबला काफी रोमांचक रहा, लेकिन धीरज ने पूरे आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए 7-3 से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ उन्होंने गोल्डन डबल पूरा किया, यानी एक ही टूर्नामेंट में दो गोल्ड मेडल जीते। यह उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा और यादगार प्रदर्शन माना जा रहा है।
सेमीफाइनल में शानदार वापसी
धीरज के लिए सेमीफाइनल मुकाबला आसान नहीं था। जर्मनी के मोरित्ज वीजर ने शुरुआत में बढ़त बना ली थी और धीरज 3-1 से पीछे चल रहे थे। लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की और अपने शॉट्स में लगातार सुधार किया। दबाव में भी उन्होंने धैर्य बनाए रखा और मुकाबला 6-4 से जीत लिया। इस जीत ने उन्हें फाइनल में पहुंचाया और उनके आत्मविश्वास को और मजबूत कर दिया।
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भारतीय आर्चरी में बड़ी उपलब्धि
इस जीत के साथ धीरज बोम्मादेवरा ने इतिहास रच दिया। यह उनका पहला व्यक्तिगत वर्ल्ड कप गोल्ड था और कुल मिलाकर चौथा वर्ल्ड कप मेडल भी। उन्होंने पुरुषों की व्यक्तिगत रिकर्व श्रेणी में भारत के लिए पांच साल का गोल्ड सूखा भी खत्म किया। वह 2021 के बाद इस इवेंट में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। इससे पहले केवल अतनु दास और जयंत तालुकदार ही यह उपलब्धि हासिल कर पाए थे। यह प्रदर्शन भारतीय तीरंदाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।