Dhiraj Bommadevara : मेक्सिको के साल्टिलो में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में भारत के धीरज बोम्मादेवरा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने भारतीय तीरंदाजी इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। धीरज विश्व कप फाइनल में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाज बन गए हैं।
रोमांचक मुकाबले में जापानी खिलाड़ी को हराया
फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। धीरज का सामना जापान के जुन्या नाकानिशी से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच पांच सेट तक कांटे की टक्कर देखने को मिली। निर्धारित सेटों के बाद मुकाबला 5-5 की बराबरी पर पहुंच गया। इसके बाद शूट-ऑफ में धीरज ने शानदार निशाना लगाते हुए 10-9 से जीत दर्ज कर ली और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
पिछली निराशाओं को पीछे छोड़ हासिल की बड़ी सफलता
25 वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बड़े मंचों पर संघर्ष कर रहे थे। 2023 और 2024 में उन्हें उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली थी, लेकिन इस बार उन्होंने शानदार वापसी करते हुए दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों को पीछे छोड़ दिया। उनकी यह जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
16 साल का इंतजार हुआ खत्म
धीरज की इस ऐतिहासिक सफलता के साथ भारत का 16 साल पुराना इंतजार भी खत्म हो गया। इससे पहले 2010 में जयंत तालुकदार ने विश्व कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। पुरुष रिकर्व वर्ग में तब से भारत किसी पदक के लिए तरस रहा था। अब धीरज ने सीधे स्वर्ण जीतकर नया इतिहास बना दिया है।
डोला बनर्जी के बाद दूसरा बड़ा कारनामा
विश्व कप फाइनल में गोल्ड जीतने वाली धीरज से पहले भारत की केवल एक तीरंदाज डोला बनर्जी थीं। उन्होंने 2007 में दुबई में महिला व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। अब लगभग दो दशक बाद भारत को फिर विश्व कप फाइनल में गोल्ड मिला है।
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एशियाई खेलों से पहले बढ़ा आत्मविश्वास
धीरज की यह जीत ऐसे समय आई है जब वह जल्द ही एशियाई खेलों में भी हिस्सा लेने वाले हैं। इस उपलब्धि से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ेगा। भारतीय खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि विश्व कप की यह सुनहरी सफलता एशियाई खेलों में भी पदकों की बरसात में बदल सकती है।