छतरपुर जिले के गढ़ा स्थित बागेश्वर धाम में 301 कन्याओं के सामूहिक विवाह की तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन से पहले पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धर्म और सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल ‘सीताराम’ जपने से धर्म सुरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि समय के अनुसार “माला और भाला” दोनों रखने होंगे। उनके इस बयान और आगामी योजनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
‘सीताराम’ के साथ आत्मरक्षा पर जोर
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म की रक्षा के लिए केवल भक्ति पर्याप्त नहीं है। उन्होंने “माला और भाला” का प्रतीकात्मक उल्लेख करते हुए कहा कि आध्यात्मिक साधना के साथ आत्मरक्षा और साहस भी जरूरी है। उनके इस बयान को धर्म, संस्कृति और सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका और यूरोप में सुंदरकांड मंडल की योजना
उन्होंने बताया कि 12 देशों में सुंदरकांड मंडल स्थापित करने के बाद अब अमेरिका में भी इसकी स्थापना की जाएगी। इसके अलावा इस वर्ष यूरोप के आठ देशों में मंडल बनाए जाने की योजना है। उन्होंने कहा कि मंडल के माध्यम से शास्त्र ज्ञान के साथ शस्त्र प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी। बेटियों को जूडो-कराटे जैसी आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने की बात भी उन्होंने कही।
301 कन्याओं का सामूहिक विवाह
बागेश्वर धाम में 13 से 15 फरवरी तक 301 कन्याओं का विवाह आयोजित किया जाएगा। 13 फरवरी से हल्दी और मेहंदी की रस्में शुरू होंगी, अगले दिन संगीत कार्यक्रम होगा और 15 फरवरी को सात फेरे, बारात व विदाई संपन्न होगी। नवदंपतियों को 30-30 हजार रुपये की एफडी, सोने की लौंग-बाली और मंगलसूत्र के साथ आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।
दाढ़ी न बनाने का संकल्प
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जब तक बेटियों का विवाह संपन्न नहीं हो जाता, तब तक वे दाढ़ी नहीं बनवाएंगे। उन्होंने इसे एक संकल्प और तपस्या का रूप बताया। साथ ही कहा कि वे एक समय फलाहार कर रहे हैं और दूसरे समय औषधि ले रहे हैं। विवाह आयोजन को उन्होंने पुण्य और सामाजिक जिम्मेदारी का कार्य बताया।
संतों और प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में कई संत और धार्मिक हस्तियां शामिल होंगी। इसके साथ ही खेल और समाज के क्षेत्र से जुड़े कुछ नामचीन लोग भी उपस्थित रहेंगे। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर धाम परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन को धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जा रहा है।