बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने Gen-Z को तेज गति से आगे बढ़ने वाली पीढ़ी बताया है। TV9 भारतवर्ष के स्टूडियो में बातचीत के दौरान उन्होंने युवाओं के सोचने और काम करने के तरीके पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी अपने अधिकारों को लेकर जागरूक है और अपनी बात रखने का साहस रखती है। हालांकि, उन्होंने युवाओं को तेज गति के साथ सही दिशा बनाए रखने की सलाह भी दी।
तेज गति के साथ दिशा भी जरूरी
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि Gen-Z की खासियत उसकी तेज गति है। युवाओं में बदलाव को स्वीकार करने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का उत्साह है। उन्होंने कहा कि देश युवाओं का है और आजादी के आंदोलन में भी युवाओं की बड़ी भूमिका रही है। उनके मुताबिक, युवाओं को तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन यह भी पता होना चाहिए कि उन्हें किस दिशा में जाना है।
विचार नए हों, संस्कार पुराने रहें
Gen-Z की भाषा को लेकर पूछे गए सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भले ही वह युवाओं की भाषा पूरी तरह न समझ पाएं, लेकिन उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि उनके विचार आधुनिक और नए हो सकते हैं, लेकिन संस्कार अपनी परंपराओं से जुड़े रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में युवाओं को अपनी पहचान और मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है, ताकि वे किसी के प्रभाव में आकर अपनी दिशा न खो दें।
बदलाव के साथ संतुलन जरूरी
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन परिवर्तन ऐसा नहीं होना चाहिए जिसका समाज या देश पर नकारात्मक असर पड़े। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को देश की ताकत बताते हुए कहा कि सही दिशा मिलने पर यही ऊर्जा सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने युवाओं को अपनी संगत और आसपास के माहौल को लेकर भी सजग रहने की सलाह दी।
विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा जरूरी
जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछे जाने पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने कहा कि विरोध करते समय मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति या व्यवस्था का विरोध करते हुए देश और राष्ट्रीय प्रतीकों का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी आवाज मजबूती से उठाएं, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादाओं और देश के सम्मान का ध्यान भी रखें।