Dhruv Jurel Tattoo : श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने शानदार शतक जड़कर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लेकिन उनकी 115 रन की नाबाद पारी से ज्यादा चर्चा उस खास जश्न की हो रही है, जिसमें उन्होंने अपनी बांह पर बने "जय जवान, जय किसान" टैटू को दिखाया और मैदान पर सलाम किया। इस जश्न के पीछे की कहानी बेहद भावुक और प्रेरणादायक है।
पिता और दादा को समर्पित था यह जश्न
ध्रुव जुरेल ने बताया कि उनका यह जश्न उनके पिता और दादा को समर्पित था। उनके पिता नेम चंद भारतीय सेना में रह चुके हैं और 1999 के कारगिल युद्ध में भी देश की सेवा कर चुके हैं। वहीं उनके दादा किसान थे। जुरेल का कहना है कि उनकी असली पहचान इन्हीं दो लोगों से जुड़ी है और वह अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहते।
'जय जवान, जय किसान' से खास जुड़ाव
ध्रुव जुरेल की बांह पर बना "जय जवान, जय किसान" टैटू सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उनके परिवार की कहानी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ उनके पिता देश की रक्षा करते रहे, तो दूसरी तरफ उनके दादा खेतों में मेहनत करते थे। यही वजह है कि उन्होंने इस संदेश को हमेशा अपने साथ रखने का फैसला किया। शतक के बाद टैटू दिखाकर उन्होंने अपने परिवार को सम्मान दिया।
मुश्किल समय में आया यादगार शतक
कोलंबो टेस्ट में जुरेल ने 177 गेंदों पर नाबाद 115 रन की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी की बदौलत टीम इंडिया ने 503 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। यह उनके टेस्ट करियर का दूसरा शतक भी रहा। खास बात यह है कि हाल के दिनों में टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा चल रही थी, लेकिन इस पारी ने उनकी दावेदारी और मजबूत कर दी है।
ऋषभ पंत से लेते हैं सलाह
ध्रुव जुरेल ने विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पंत के पास बड़े मैचों का काफी अनुभव है और वह अक्सर उनसे सलाह लेते हैं। हालांकि जुरेल का मानना है कि हर खिलाड़ी की अपनी अलग शैली होती है और वह किसी की नकल करने के बजाय अपने खेल पर भरोसा रखते हैं।
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जड़ों से जुड़े रहने का संदेश
ध्रुव जुरेल का यह शतक सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और परिवार के सम्मान की भी कहानी है। मैदान पर दिखाया गया "जय जवान, जय किसान" टैटू इस बात का प्रतीक बन गया कि सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अपनी पहचान और अपने लोगों को कभी नहीं भूलना चाहिए।