बॉक्स ऑफिस पर एकतरफा मुकाबला : इस समय बॉक्स ऑफिस पर जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, वह काफी दिलचस्प है. जहां एक तरफ बड़ी स्टारकास्ट और भारी बजट वाली फिल्मों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी, वहीं दूसरी ओर ‘धुरंधर’ ने सारी गणनाओं को पीछे छोड़ते हुए बाज़ी मार ली है। इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि कमाई के मामले में भी अपने प्रतिद्वंद्वियों ‘द राजा साब’ और ‘इक्कीस’ को कड़ी टक्कर देते हुए उन्हें काफी पीछे छोड़ दिया है। शुरुआती दिनों में ही यह साफ हो गया कि बॉक्स ऑफिस पर मुकाबला बराबरी का नहीं, बल्कि पूरी तरह एकतरफा है.
‘धुरंधर’ की तूफानी कमाई ने बदला गेम
‘धुरंधर’ ने रिलीज़ के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ बना ली. फिल्म को पहले दिन से ही शानदार ओपनिंग मिली और इसके बाद वीकेंड पर कलेक्शन में तेज़ उछाल देखने को मिला। मजबूत कहानी, दमदार निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचा। वर्ड-ऑफ-माउथ इतना मजबूत रहा कि वीकडेज़ में भी फिल्म की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी। ट्रेड पंडितों का मानना है कि ‘धुरंधर’ की सफलता की सबसे बड़ी वजह यह है कि फिल्म हर वर्ग के दर्शकों को कनेक्ट कर पाई, चाहे वो युवा हों या फैमिली ऑडियंस.
‘द राजा साब’ की उम्मीदें रहीं अधूरी
प्रभास स्टारर ‘द राजा साब’ से काफी उम्मीदें थीं। हॉरर-कॉमेडी जॉनर और बड़े नामों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर वह जादू नहीं चला पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। शुरुआती दिनों में औसत ओपनिंग के बाद फिल्म की कमाई में तेजी से गिरावट देखने को मिली। खासतौर पर हिंदी बाजार में फिल्म दर्शकों को बांधकर रखने में नाकाम रही। कमजोर वर्ड-ऑफ-माउथ और मिश्रित रिव्यूज़ के चलते ‘द राजा साब’ का कलेक्शन सीमित दायरे में ही सिमट गया, जबकि उसी दौरान ‘धुरंधर’ लगातार आगे निकलती चली गई.
‘इक्कीस’ का भी नहीं चला दांव
‘इक्कीस’ भी उन फिल्मों में शामिल थी, जिनसे निर्माताओं को अच्छा प्रदर्शन की उम्मीद थी। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को लेकर भले ही कुछ तारीफें हुई हों, लेकिन यह दर्शकों की भीड़ खींचने में असफल रही। रिलीज़ के पहले हफ्ते में ही इसके कलेक्शन ने संकेत दे दिया था कि फिल्म लंबी रेस की खिलाड़ी नहीं बन पाएगी। ‘धुरंधर’ और ‘द राजा साब’ जैसी फिल्मों की मौजूदगी में ‘इक्कीस’ का स्क्रीन शेयर और शो टाइम भी सीमित होता चला गया, जिससे इसकी कमाई पर सीधा असर पड़ा.
क्यों भारी पड़े कंटेंट और वर्ड-ऑफ-माउथ
इस पूरे बॉक्स ऑफिस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिर्फ स्टार पावर या बड़े बजट से फिल्म नहीं चलती। ‘धुरंधर’ के मामले में मजबूत स्क्रिप्ट, सटीक निर्देशन और दर्शकों से जुड़ने वाली भावनाएं इसकी सबसे बड़ी ताकत बनीं। वहीं दूसरी ओर ‘द राजा साब’ और ‘इक्कीस’ कंटेंट के स्तर पर दर्शकों को पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाईं। आज का दर्शक काफी समझदार हो चुका है और सोशल मीडिया व रिव्यूज़ के ज़रिए वह जल्दी फैसला ले लेता है कि किस फिल्म पर पैसा और समय लगाना है.
आगे क्या कहती है बॉक्स ऑफिस की तस्वीर
मौजूदा ट्रेंड्स को देखते हुए साफ है कि आने वाले दिनों में भी ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखेगी. फिल्म की कमाई में स्थिरता बनी हुई है, जबकि ‘द राजा साब’ और ‘इक्कीस’ के कलेक्शन में धीरे-धीरे गिरावट देखी जा रही है। यह मुकाबला इंडस्ट्री के लिए भी एक सबक है कि दर्शकों को अब सिर्फ नाम नहीं, बल्कि दमदार कहानी चाहिए।
कुल मिलाकर, इस बॉक्स ऑफिस जंग में ‘धुरंधर’ ने साफ तौर पर ‘द राजा साब’ और ‘इक्कीस’ की सिट्टी-पिट्टी गुम कर दी है और यह साबित कर दिया है कि असली जीत कंटेंट की होती है, न कि सिर्फ चमक-धमक की.