Diabetes Risk Before 30 : आज के समय में शुगर यानी डायबिटीज को केवल उम्र बढ़ने की बीमारी मानना सही नहीं है। भारत में डायबिटीज और प्री-डायबिटीज का बोझ काफी बड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में 18 साल से अधिक उम्र के करीब 7.7 करोड़ लोग टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 2.5 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। कम उम्र में बढ़ता वजन, कम शारीरिक गतिविधि और खान-पान की गलत आदतें आगे चलकर ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती हैं। अच्छी बात यह है कि जीवनशैली में छोटे बदलाव करके टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम या टाला जा सकता है।
दिनभर बैठे रहना बन सकता है बड़ी वजह
ऑफिस का काम, पढ़ाई और लगातार मोबाइल या कंप्यूटर चलाने की वजह से कई लोग घंटों बैठे रहते हैं। शरीर को पर्याप्त गतिविधि न मिलने पर वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। नियमित चलना, सीढ़ियां चढ़ना और रोज कुछ समय व्यायाम करना मददगार हो सकता है। WHO भी टाइप-2 डायबिटीज से बचाव के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि की सलाह देता है।
मीठे पेय की आदत को हल्के में न लें
चाय-कॉफी में ज्यादा चीनी, मीठे पैकेट वाले पेय, मिठाइयां और बार-बार मीठा खाने की आदत शरीर में अतिरिक्त चीनी पहुंचा सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि कभी-कभार मीठा खाना ही डायबिटीज की वजह है, लेकिन रोज की अधिक चीनी वाली आदत लंबे समय में स्वस्थ खान-पान को बिगाड़ सकती है।
नींद और बिगड़ी दिनचर्या पर भी दें ध्यान
देर रात तक जागना और लगातार बदलती दिनचर्या शरीर के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। अच्छी नींद के साथ नियमित दिनचर्या रखना स्वस्थ जीवनशैली का जरूरी हिस्सा है। अगर देर रात तक जागने की वजह से सुबह का नाश्ता छूटता है या पूरे दिन खाने का समय बिगड़ा रहता है, तो इस आदत को बदलना बेहतर है।
पेट की चर्बी को सिर्फ सुंदरता का मुद्दा न समझें
कम उम्र में बढ़ता वजन खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण हो सकती है। WHO के अनुसार अधिक वजन और मोटापा डायबिटीज के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसलिए वजन को लेकर सिर्फ दिखावट नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य के नजरिए से सोचना जरूरी है।
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छोटे बदलाव आज से ही शुरू करें
डायबिटीज का खतरा कम करने के लिए किसी कठिन योजना की जरूरत नहीं होती। रोज नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, स्वस्थ वजन और तंबाकू से दूरी जैसे कदम काफी महत्वपूर्ण हैं। अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, वजन बढ़ रहा है या बार-बार बहुत प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और बिना वजह थकान जैसे लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच कराना बेहतर है। ध्यान रखें, केवल लक्षणों के आधार पर डायबिटीज का पता नहीं लगाया जा सकता।