प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में बन रहे दिबांग मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह मेगा बांध किसी भी हाल में 91 महीनों यानी साल 2032 तक पूरा होना चाहिए। यह सिर्फ बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारत की जल सुरक्षा और रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा है। दिबांग बांध के बन जाने से भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ चीन के जल दबाव का रणनीतिक जवाब भी मिलेगा।
भारत का सबसे ऊंचा बांध, 91 महीनों में तैयार
दिबांग मल्टीपर्पज़ प्रोजेक्ट भारत की अब तक की सबसे बड़ी हाइड्रोपावर परियोजना है। NHPC लिमिटेड द्वारा संचालित यह 2880 मेगावाट क्षमता का बांध अरुणाचल प्रदेश की दिबांग घाटी में बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा करते हुए “फाइनल ऑर्डर” दिया — “देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।”
इस प्रोजेक्ट पर लगभग ₹17,069 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इसका निर्माण कार्य अगले 91 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत का ‘वॉटर कवच’
दिबांग प्रोजेक्ट की रणनीतिक अहमियत तब और बढ़ी जब चीन ने तिब्बत में यारलुंग सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाने की घोषणा की। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के इस कदम से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ऐसे में दिबांग बांध एक “वॉटर डिफेंस सिस्टम” की तरह काम करेगा — जिससे चीन की ओर से छोड़े गए अतिरिक्त जल को नियंत्रित किया जा सकेगा और असम व अरुणाचल में बाढ़ की आशंका कम होगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
दिबांग बांध सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में भी भारत की बड़ी छलांग है। यह प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर भारत में बिजली उत्पादन को कई गुना बढ़ा देगा और ग्रिड स्थिरता में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढांचे को भी नई गति मिलेगी।
पीएम मोदी का फाइनल ऑर्डर: “रिज़ल्ट चाहिए, देरी नहीं”
प्रधानमंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि “देरी हर प्रोजेक्ट को दोहरी कीमत पर पहुंचा देती है — पैसा भी बढ़ता है और जनता को सुविधाएं भी देर से मिलती हैं।” उन्होंने अधिकारियों को ‘रिज़ल्ट-ओरिएंटेड अप्रोच’ अपनाने का निर्देश दिया और राज्य सरकारों से कहा कि वे अपने स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत करें।
विकास से रणनीति तक भारत की नई छलांग
दिबांग प्रोजेक्ट न सिर्फ भारत के ‘न्यू नॉर्थईस्ट डेवलपमेंट मिशन’ का केंद्र बनेगा, बल्कि चीन की जल रणनीति का संतुलित जवाब भी देगा। यह परियोजना ऊर्जा, सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की एक साथ झलक पेश करती है — जो आने वाले दशक में भारत की जल और बिजली नीति की दिशा तय करेगी।