
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानि UNSC में वीटो पॉवर मिल गया है। इस वीडियो में एक कहा जा रहा है कि अमेरिका के विरोध के बाद भारत को बड़ी उपलब्धि मिली है। इस वीडियो पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी। इसे ऐतिहासिक पल बताया गया है। मगर यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है। ये एक डीपफेक वीडियो बताया गया है।
आपको बता दें कि यूएनएससी में सिर्फ स्थाई सदस्य ही वीटो पॉवर का उपयोग कर सकते हैं। भारत यूएनएससी का स्थाई सदस्य नहीं है। ऐसे में भारत के पास वीटो पॉवर आने का कोई मतलब नहीं है। वीटो पॉवर का अधिकार अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन के पास मौजूद है। इन्हें P5 यानि स्थायी सदस्य कहा गया है। किसी भी नये सदस्य को इस तरह का अधिकार नहीं है। इसीलिए ये पांच देश जियो-पॉलिटिक्स में काफी अहम माने जाते हैं।
UNSC में सुधार की मांग
भारत वर्षों से यूएनएससी में सुधार की डिमांड करता रहा है। मौजूदा ढांचे में सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें गैर-स्थायी सदस्य दो साल के लिए चुने जाते हैं। वायरल की गई फर्जी खबर के बीच दिलचस्प वाकया हुआ है। सिंगापुर के पूर्व डिप्लोमेट किशोर महबूबानी, जो संयुक्त राष्ट्र में देश के स्थायी प्रतिनिधि रहे हैं, उन्होंने ब्रिटेन से यूएनएससी में अपनी स्थायी सदस्यता छोड़ने और सीट भारत को सौंपने को कहा है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी कि दुनिया की शक्ति-संरचना में बीते कुछ दशकों में भारी बदलाव हुए हैं।