देश में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नए आदेश के तहत अब पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने पर रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि कुछ औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता रिटेल पंपों से भारी मात्रा में डीजल खरीद रहे थे, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी पैदा होने की आशंका बढ़ रही थी। इसी को देखते हुए नए नियम लागू किए गए हैं।
200 लीटर की सीमा तय
नए आदेश के अनुसार अब किसी भी वाहन या ग्राहक को एक दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जाएगा। डीजल केवल वाहन के टैंक या अधिकृत कंटेनर में ही भरा जा सकेगा। यानी अब कोई भी व्यक्ति या संस्था पेट्रोल पंप से तय सीमा से अधिक डीजल नहीं खरीद पाएगी। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
थोक खरीदारों पर लगी रोक
मॉल, अस्पताल, बड़ी फैक्ट्रियां, ट्रांसपोर्ट कंपनियां और निजी बस ऑपरेटर जैसे बड़े उपभोक्ताओं को अब रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपनी जरूरत का ईंधन केवल बल्क सेल प्वाइंट्स से खरीदना होगा। सरकार का कहना है कि रिटेल पंप आम लोगों के लिए हैं और उनका उपयोग बड़े स्तर की खरीद के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
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क्यों उठाना पड़ा यह कदम
सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक रिटेल और थोक कीमतों में बड़ा अंतर होने के कारण कई बड़े उपभोक्ता पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे थे। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में रिटेल पंप पर डीजल की कीमत करीब 95 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक बिक्री में इसकी कीमत 134 रुपये प्रति लीटर के आसपास है। इसी अंतर का फायदा उठाकर बड़ी मात्रा में खरीदारी की जा रही थी, जिससे तेल कंपनियों को नुकसान हो रहा था।
90 दिनों तक रहेगा लागू
पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। फिलहाल यह व्यवस्था 90 दिनों तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान सरकार ईंधन की उपलब्धता और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखेगी। जरूरत पड़ने पर आगे भी इस व्यवस्था को जारी रखा जा सकता है।
आम लोगों को क्या फायदा होगा
सरकार का दावा है कि इस फैसले से आम वाहन चालकों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम होगी और अचानक डीजल की कमी जैसी स्थिति पैदा होने की संभावना भी घटेगी। साथ ही ईंधन की आपूर्ति अधिक व्यवस्थित रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मौजूदा वैश्विक हालात और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।