डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ़्रेडरिक्सन ने गुरुवार को कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ मतभेद अब भी बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन में हुई हालिया बातचीत कठिन रही और अमेरिका की ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की महत्वाकांक्षा, डेनमार्क के कड़े विरोध के बावजूद, अब भी कायम है। बुधवार को वॉशिंगटन में हुई बैठक के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए फ़्रेडरिक्सन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “यह आसान बैठक नहीं थी। मैं दोनों मंत्रियों का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने राज्य (डेनमार्क साम्राज्य) के रुख को स्पष्ट और मजबूती से रखा और अमेरिकी दावों का प्रतिवाद किया। यह बेहद ज़रूरी था।”
अमेरिकी महत्वाकांक्षा बरकरार
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर एक कार्य समूह गठित किया जाएगा, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने कहा, “इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि बुनियादी असहमति बनी हुई है, क्योंकि ग्रीनलैंड को अपने अधीन लेने की अमेरिकी महत्वाकांक्षा बरकरार है। यह स्पष्ट रूप से गंभीर मामला है और इसलिए हम इस परिदृश्य को वास्तविकता बनने से रोकने के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।”
विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ट ने बुधवार को वॉशिंगटन में ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। इस पर टिप्पणी करते हुए फ़्रेडरिक्सन ने कहा, “ग्रीनलैंड की रक्षा और सुरक्षा पूरे नाटो गठबंधन की साझा चिंता है।”
राजनीतिक और सैन्य समर्थन बढ़ा दिया
इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) और नाटो सहयोगियों ने ग्रीनलैंड को राजनीतिक और सैन्य समर्थन बढ़ा दिया है। यह कदम आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीप को लेकर हाल में बयान दिए हैं।