
देश में पहली बार जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से आयोजित की जाएगी। वर्ष 2026-27 में होने वाली इस ऐतिहासिक जनगणना से पहले मध्य प्रदेश के तीन जिलों – ग्वालियर, रतलाम और सिवनी में प्री टेस्ट अभियान चलाया जाएगा। इस कदम से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल जनगणना के लिए एक नया मोबाइल ऐप तैयार किया जा रहा है, जिससे हर घर से जानकारी सीधे ऑनलाइन जमा होगी।
डिजिटल जनगणना का नया युग
देश में 15 साल बाद फिर से जनगणना का आयोजन किया जा रहा है। इस बार इसे डिजिटल तरीके से किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन तैयार किया जा रहा है, जो एंड्राइड और आईफोन दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इस एप के माध्यम से प्रत्येक घर का मुखिया स्वयं अपने परिवार का डाटा दर्ज करेगा। इसके बाद जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर इन जानकारियों का क्रॉस चेक करेंगे और उसे डिजिटल फॉर्मेट में अपलोड करेंगे।
जनगणना निदेशालय के अनुसार, प्रत्येक अधिकारी को लगभग 150 से 175 घरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस प्रक्रिया से डेटा की विश्वसनीयता और सटीकता में वृद्धि होगी।
मध्य
प्रदेश में प्री-टेस्ट
का आयोजन
जनगणना से पहले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्री-टेस्ट अभियान चलाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिले शामिल हैं। अक्टूबर और नवंबर माह के बीच 15 दिनों का यह अभियान चलेगा। इसका उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया की कार्यप्रणाली का पूर्व परीक्षण करना है ताकि संभावित गड़बड़ियों को समय रहते रोका जा सके।
इस प्री-टेस्ट में घर-घर जाकर घरों की गिनती एवं जनसंख्या का डेटा संकलित किया जाएगा। यह कदम आगामी डिजिटल जनगणना को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा।
जनगणना के दो चरण
1. पहला चरण (अप्रैल 2026):
इस चरण में घरों और मकानों की गिनती की जाएगी। मकानों की पूरी सूची तैयार होगी।
2. दूसरा चरण (फरवरी 2027):
इस चरण में लोगों की संख्या, जाति, शिक्षा, रोजगार, संपत्ति संबंधी जानकारी एकत्रित की जाएगी।
जनगणना निदेशालय की निदेशक भावना वालिम्बे ने बताया कि फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट बनाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर अंतिम जनगणना शीट तैयार की जाएगी।
डिजिटल
जनगणना का महत्व
यह भारत की अब तक की सबसे आधुनिक जनगणना होगी। इससे डेटा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी होगी। पुराने समय में कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर रही जनगणना अब मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल रूप से होगी। इससे डेटा में गड़बड़ी की संभावना बहुत कम होगी।
सरकार ने देश भर में लगभग 34 लाख जनगणना कर्मियों को तीन स्तरों – राष्ट्रीय ट्रेनर, मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर के रूप में तैयार किया है। ये कर्मचारी अलग-अलग गांव, शहर और मोहल्लों की जिम्मेदारी संभालेंगे।