भारत में डिजिटल क्रांति अब नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। नीति आयोग ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI 2.0 का रोडमैप तैयार किया है। इसका मकसद सिर्फ ऑनलाइन पेमेंट तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी सेवाओं को पूरी तरह आसान और तेज बनाना है। इससे आम लोगों को हर काम के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और ज्यादातर काम मोबाइल से ही हो जाएंगे।
DPI 2.0 से क्या बदलेगा
DPI 2.0 का लक्ष्य भारत को डिजिटल यूजर से डिजिटल पावरहाउस बनाना है। इस मॉडल के तहत छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और स्टार्टअप को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना है। इससे उन्हें ग्लोबल मार्केट तक पहुंच मिलेगी और कमाई के नए रास्ते खुलेंगे। सरकार चाहती है कि डिजिटल सिस्टम सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि रोजगार और विकास का साधन भी बने।
DPI 3.0 और स्मार्ट गवर्नेंस
आगे चलकर DPI 3.0 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सरकार पहले ही अंदाजा लगा सकेगी कि लोगों को कहां दिक्कत आ सकती है और समय रहते समाधान दे सकेगी। इसका मतलब है कि सरकारी सेवाएं और तेज होंगी, फाइलें अटकेंगी नहीं और लोगों को बार-बार दफ्तर नहीं जाना पड़ेगा।
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किसानों और स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव
कृषि क्षेत्र में एग्रीस्टैक के जरिए किसानों को बीज, मौसम और बाजार की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। इससे उनकी फैसले लेने की क्षमता बेहतर होगी और आय बढ़ेगी। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से डॉक्टर को मरीज की पूरी जानकारी तुरंत मिल जाएगी, जिससे इलाज तेज और सटीक होगा।
लोन, ट्रांसपोर्ट और कोर्ट में राहत
फाइनेंस सेक्टर में डिजिटल डेटा के आधार पर लोन मिलना आसान होगा, जिससे लोगों को ज्यादा कागजी प्रक्रिया नहीं करनी पड़ेगी। लॉजिस्टिक्स में सामान की डिलीवरी तेज और सस्ती होगी, जिससे महंगाई पर भी असर पड़ेगा। वहीं ई-कोर्ट सिस्टम के जरिए मामलों का निपटारा जल्दी होगा और लोगों को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।