मध्य प्रदेश सरकार ने न्याय प्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य की 120 जेलों में 500 नए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम बनाए जाएंगे, जिससे विचाराधीन बंदियों की ऑनलाइन पेशी संभव हो सकेगी। यह व्यवस्था न केवल न्याय प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि समय और संसाधनों की बचत भी सुनिश्चित करेगी। 'न्याय श्रुति योजना' के तहत किए जा रहे इस नवाचार से जेलों की व्यवस्था और अधिक सुरक्षित, तकनीकी और प्रभावी बन रही है।
वीसी रूम्स से होगी ऑनलाइन पेशी
मध्य प्रदेश की जेलों में अब विचाराधीन बंदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जाएगी। इसके लिए 500 नए वीसी रूम तैयार किए जाएंगे। इससे बंदियों को बार-बार अदालत ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे पुलिस बल और समय दोनों की बचत होगी।
साउंडप्रूफ और इकोप्रूफ होंगे रूम
इन रूम्स को खासतौर पर साउंडप्रूफ और इकोप्रूफ बनाया जा रहा है ताकि सुनवाई के दौरान कोई तकनीकी या ऑडियो समस्या न आए। इससे न्यायाधीश, अभियोजन और बचाव पक्ष सभी को सुनवाई के दौरान बेहतर संवाद का अनुभव मिलेगा
वीसी सेटअप की संख्या होगी 832
वर्तमान में राज्य में 332 वीसी सेटअप हैं, लेकिन 'न्याय श्रुति योजना' लागू होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 832 हो जाएगी। इसका सीधा लाभ जेल प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को मिलेगा।
नए कानूनों के तहत तकनीक को प्राथमिकता
देश में 1 जुलाई 2024 से लागू नए आपराधिक कानूनों के तहत तकनीक को विशेष महत्व दिया गया है। इसी के अंतर्गत यह पहल की जा रही है, जिससे न्याय प्रणाली को विक्टिम फ्रेंडली और तेज बनाया जा सके।
2000 से अधिक लोकेशनों पर लगेंगे सेटअप
प्रदेश में स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो को 2000 से ज्यादा लोकेशनों पर ऐसे तकनीकी सेटअप लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह पहल भविष्य में डिजिटल अदालतों के रास्ते खोल सकती है।