कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “हिंदू कोई धर्म नहीं है” और भारत को “हिंदू राष्ट्र” नहीं बल्कि “भारतवर्ष” कहा जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पुणे में दिया विवादित बयान
पुणे में पत्रकारों से चर्चा के दौरान दिग्विजय सिंह ने “हिंदू राष्ट्र” की अवधारणा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में देश का नाम “भारत” या “भारतवर्ष” है, इसलिए इसे हिंदू राष्ट्र कहना उचित नहीं है। उनके इस बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
संविधान का दिया हवाला
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए कहा कि “वी द पीपल ऑफ इंडिया, दैट इज भारत” स्पष्ट रूप से देश की पहचान बताता है। उनका तर्क है कि जब संविधान में देश की परिभाषा तय है, तो धार्मिक आधार पर राष्ट्र की संज्ञा क्यों दी जाए।
RSS प्रमुख के बयान से जुड़ी बहस
इस मुद्दे की पृष्ठभूमि में मोहन भागवत का वह बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। दिग्विजय सिंह के ताजा बयान को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जिससे बहस और तेज हो गई है।
जनता की नाराजगी और सियासी प्रतिक्रिया
बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने नाराजगी जताई है। कुछ ने इसे हिंदू विरोधी बताया, तो कुछ ने इसे वोट बैंक राजनीति से जोड़कर देखा। इसके अलावा उन्होंने टी20 विश्व कप के दौरान भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के हाथ न मिलाने के मुद्दे पर भी कहा कि खिलाड़ियों को खेल भावना बनाए रखनी चाहिए।