मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा को लेकर हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संकेत दिए हैं कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाएंगे और अब पूरी तरह मध्य प्रदेश की राजनीति पर फोकस करेंगे। उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस में राज्यसभा की दावेदारी और सामाजिक संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
तीसरी बार राज्यसभा नहीं, एमपी में फुल टाइम राजनीति
दिग्विजय सिंह का दूसरा राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने पार्टी नेतृत्व को साफ कर दिया है कि वे अब राज्यसभा नहीं जाना चाहते। 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश में रहकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम करेंगे। उनका फोकस बड़े मंचों की बजाय विधानसभा, ब्लॉक और बूथ स्तर की बैठकों पर रहेगा।
संगठन मजबूत करने का रोडमैप
दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के सामने दिए गए प्रेजेंटेशन में दिग्विजय सिंह ने संगठनात्मक सुधारों पर जोर दिया था। योजना के तहत बूथ से मंडल स्तर तक पदयात्रा, मंडल से ब्लॉक तक बाइक यात्रा और ब्लॉक से जिला स्तर तक संगठनात्मक यात्राएं निकाली जाएंगी। मकसद सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद कर जमीनी पकड़ मजबूत करना है।
SC वर्ग को राज्यसभा भेजने की मांग
राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर सामाजिक प्रतिनिधित्व की बहस भी तेज हो गई है। अनुसूचित जाति विभाग के एक वरिष्ठ नेता ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर मांग की है कि खाली होने वाली सीट पर अनुसूचित जाति वर्ग से नेता को मौका दिया जाए। पत्र में सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति की बात कहते हुए राज्यसभा में संतुलित प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया है।
कई दिग्गज रेस में, सियासी गणित उलझा
दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद राज्यसभा की एक सीट के लिए कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और मीनाक्षी नटराजन जैसे नाम सामने आ रहे हैं। पार्टी के भीतर इस बात पर मंथन जारी है कि किसे दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जाए।
दबाव की राजनीति या नई रणनीति?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह की सक्रियता केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। वे दलित और सामाजिक न्याय के मुद्दों को फिर से केंद्र में लाकर पार्टी पर रणनीतिक दबाव भी बना रहे हैं। बदलती पीढ़ी और नेतृत्व के बीच संतुलन साधते हुए वे मध्य प्रदेश में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने की कोशिश में जुटे हैं।