UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच महिला मतदाताओं को लेकर सियासी मुकाबला तेज होता दिखाई दे रहा है। दोनों प्रमुख दल महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त बस यात्रा की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी ने भी महिलाओं को केंद्र में रखते हुए अपना बड़ा चुनावी दांव चला। सपा सांसद डिंपल यादव ने महिलाओं के लिए ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ का ऐलान करते हुए हर साल 40 हजार रुपये देने का वादा किया। इसके बाद बीजेपी ने भी अपनी महिला नेताओं को आगे कर सपा के इस कदम का राजनीतिक जवाब देना शुरू कर दिया है।
डिंपल यादव के सीधे तौर पर महिला मतदाताओं के बीच सक्रिय होने के बाद बीजेपी ने महिला नेताओं के जरिए सपा पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी की महिला नेताओं ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और सपा शासनकाल से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। बीजेपी की रणनीति साफ तौर पर महिला वोट बैंक के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने और सपा के चुनावी वादों पर सवाल खड़े करने की नजर आ रही है।
सपा ने महिलाओं को लेकर खोला मोर्चा
समाजवादी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महिलाओं को अपने चुनावी एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश की है। इसी क्रम में मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने पार्टी कार्यालय में महिला नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने ‘स्त्री सम्मान समृद्धि योजना’ की घोषणा करते हुए कहा कि महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक मजबूती के बिना प्रदेश का विकास अधूरा है। डिंपल यादव ने महिलाओं के लिए आर्थिक मदद के साथ शिक्षा, प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधाओं पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मोबाइल, लैपटॉप, शिक्षा और कौशल विकास जैसी सुविधाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने सपा के पीडीए की व्याख्या में महिलाओं यानी आधी आबादी की भागीदारी को भी प्रमुखता दी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बीजेपी को घेरा। उन्होंने महिला आरक्षण कानून का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब संसद से कानून पारित हो चुका है तो इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है।
बीजेपी की महिला नेताओं ने संभाला मोर्चा
सपा के इस दांव के बाद बीजेपी की महिला नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया। योगी सरकार में मंत्री गुलाब देवी ने सपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में बेटियों और महिलाओं को लेकर असुरक्षा का माहौल था। उन्होंने सपा की महिला नेता रोली मिश्रा से जुड़े कथित अभद्रता के मामले का भी जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाया। गुलाब देवी ने कहा कि मौजूदा सरकार में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने पर जोर दिया जा रहा है और प्रदेश में महिलाएं पहले की तुलना में खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
शालिनी यादव और ऋचा राजपूत का भी हमला
बीजेपी नेता शालिनी यादव ने सपा के चुनावी वादों को लेकर निशाना साधा। उनका कहना था कि महिलाओं को बड़े-बड़े सपने दिखाने से पहले सपा को अपने शासनकाल में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के दौरान सपा के रुख का हवाला देते हुए विपक्ष पर महिला विरोधी सोच रखने का आरोप लगाया।
वहीं यूपी ओबीसी आयोग की सदस्य डॉ. ऋचा राजपूत ने भी सपा पर हमला बोला। उन्होंने सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं पर महिलाओं से जुड़े विवादों का हवाला देते हुए पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर सपा के दावों पर जनता आसानी से भरोसा नहीं करेगी।
बीजेपी में आने के बाद पूजा पाल ने भी साधा निशाना
सपा के टिकट पर विधायक रह चुकीं और बाद में बीजेपी में शामिल हुईं पूजा पाल ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने डिंपल यादव को लेकर की गई एक मौलाना की कथित टिप्पणी का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव पर सवाल उठाया। पूजा पाल ने कहा कि जो व्यक्ति अपने परिवार की महिला के कथित अपमान के खिलाफ प्रभावी तरीके से आवाज नहीं उठा सका, वह प्रदेश की महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात कैसे कर सकता है। उन्होंने सपा सरकार के पुराने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं उस दौर से जुड़ी घटनाओं को भूली नहीं हैं।
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महिला वोटरों पर दोनों दलों की नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई है। यही वजह है कि विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही बीजेपी और सपा दोनों महिलाओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। एक तरफ सपा आर्थिक मदद और महिला सशक्तिकरण से जुड़े वादों के जरिए आधी आबादी को जोड़ने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी अपनी सरकार की योजनाओं और महिला सुरक्षा को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है। आने वाले समय में यह मुकाबला और तेज होने की संभावना है। फिलहाल डिंपल यादव के महिला केंद्रित अभियान के जवाब में बीजेपी की महिला नेताओं का मोर्चे पर उतरना इस बात का संकेत है कि 2027 के चुनाव में महिला वोटरों को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी खींचतान अहम रहने वाली है।