मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले से एक चर्चित और विवादित सरकारी आदेश सामने आया है, जिसमें कलेक्टर कार्यालय में पत्रकारों के प्रवेश पर नया प्रतिबंध लगाया गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा 30 जून 2025 को जारी इस आदेश में कहा गया है कि अब पत्रकार बिना पूर्व अनुमति कलेक्टर कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और न ही वे आगंतुकों का साक्षात्कार ले पाएंगे।इस फैसले को लेकर जिले भर में मीडिया जगत में नाराजगी और बहस का माहौल है। पत्रकारों का कहना है कि यह आदेश सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
आदेश में क्या कहा गया है?
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में दो मुख्य बातें स्पष्ट की गई हैं:
1. कोई भी पत्रकार बिना अनुमति कलेक्टर कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सकता।
2. पत्रकार किसी आगंतुक का साक्षात्कार भी बिना अनुमति नहीं ले सकते।
यह आदेश कलेक्टर कार्यालय परिसर की "सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने" के उद्देश्य से जारी किया गया है, ऐसा उसमें उल्लेख किया गया है।
पत्रकारों और संगठनों में नाराजगी
इस आदेश के खिलाफ जिले के कई पत्रकार और स्थानीय मीडिया संगठन विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में प्रेस को सरकारी दफ्तरों से सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार है और ऐसे आदेश पारदर्शिता को खत्म करने की कोशिश हैं।कई पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो संगठित विरोध और धरना प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
पहले भी जारी हो चुके हैं ऐसे आदेश
यह कोई पहला मामला नहीं है जब पत्रकारों के प्रवेश को लेकर आदेश जारी हुआ हो। पिछले महीने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसा ही आदेश जारी किया गया था, जिसमें पत्रकारों को अस्पताल में बिना अनुमति घुसने से रोका गया था। उस आदेश का भी कड़ा विरोध हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप कर आदेश वापस लेना पड़ा।
डिंडोरी कलेक्टर का यह आदेश न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि इससे जनहित से जुड़ी सूचनाओं तक पहुंच बाधित होने की भी आशंका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में प्रशासन इस आदेश पर पुनर्विचार करता है या पत्रकार समुदाय इसके खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाता है।