पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा। चुनावी नतीजों से पहले ही सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चर्चा इस बात की है कि इस बार पार्टी कोई नया और मजबूत चेहरा सामने ला सकती है, जिससे सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाएं। दिल्ली से आ रहे संकेतों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
सुवेंदु अधिकारी का नाम पीछे क्यों?
अब तक माना जा रहा था कि सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे हैं। लेकिन ताजा चर्चाओं में उनका नाम पीछे छूटता नजर आ रहा है। पार्टी इस बार ऐसा चेहरा चाहती है जो सिर्फ चुनाव जिताने तक सीमित न रहे, बल्कि लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों को मजबूती दे सके।
दिलीप घोष का नाम सबसे आगे
इस दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा दिलीप घोष की हो रही है। दिलीप घोष की पहचान एक जमीनी और आक्रामक नेता के रूप में है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के कारण उनकी संगठन पर मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनके तेवर और फैसले लेने की शैली को लेकर तुलना योगी आदित्यनाथ से भी की जा रही है, जिससे उनका नाम और मजबूत होता दिख रहा है।
स्वपन दासगुप्ता भी रेस में शामिल
दूसरी तरफ स्वपन दासगुप्ता का नाम भी तेजी से उभर रहा है। स्वपन दासगुप्ता को एक बौद्धिक और रणनीतिक नेता के तौर पर देखा जाता है। उनकी नीति और विचारधारा पर पकड़ मजबूत है। पार्टी के भीतर उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो सरकार को स्थिरता दे सकता है और बड़े फैसले लेने में सक्षम है।
शाह और योगी की भूमिका अहम
दिल्ली से मिल रहे संकेतों में सबसे अहम बात यह है कि अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की पसंद इस बार निर्णायक हो सकती है। पार्टी नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और इसलिए हर पहलू पर गहराई से विचार किया जा रहा है। यही वजह है कि अंतिम नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
टीएमसी में बढ़ी चिंता, बड़ा फैसला करीब
इन चर्चाओं के बीच ममता बनर्जी के खेमे में भी बेचैनी बढ़ती दिख रही है। अगर विपक्ष एक मजबूत चेहरा सामने लाता है तो मुकाबला और कड़ा हो सकता है। फिलहाल आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि फैसला अब ज्यादा दूर नहीं है। जो भी चेहरा सामने आएगा, वही बंगाल की राजनीति की दिशा तय करेगा।