Disha Salian Case : करीब छह साल पुराने दिशा सालियान मौत मामले में अब जांच का एक नया दौर शुरू हो गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब एजेंसी का फोकस उस रात हुई घटनाओं, उपलब्ध सबूतों और पहले हुई जांच में सामने आए सवालों को दोबारा देखने पर रहेगा।
उस रात आखिर क्या हुआ था
दिशा सालियान की मौत 9 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने इसे आकस्मिक मौत के तौर पर दर्ज किया था और जांच के बाद आत्महत्या की बात कही थी। 2023 में राज्य सरकार की ओर से बनाई गई विशेष जांच टीम ने भी मौत में किसी साजिश के सबूत नहीं मिलने की बात कही थी। अब सीबीआई इसी पूरे घटनाक्रम को नए सिरे से देख रही है।
सीबीआई के सामने मोबाइल से जुड़े सवाल
जांच में दिशा के मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी भी अहम हो सकती है। सीबीआई फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, संदेश और उससे जुड़े डिजिटल सबूतों की जांच कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक एफआईआर में फोन को लेकर अलग-अलग दावों और रिकॉर्ड में कथित अंतर की भी जांच की बात सामने आई है। हालांकि इन दावों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
पुराने पुलिस रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
सीबीआई पहले मामले की जांच कर चुके पुलिस अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों और दूसरे संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। एजेंसी यह भी देखेगी कि शुरुआती जांच में जुटाए गए सबूत और रिकॉर्ड किस तरह संभाले गए थे और क्या किसी महत्वपूर्ण जानकारी की कमी रह गई थी। मामला पुराना होने की वजह से जांच एजेंसी के सामने पुराने डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को दोबारा जोड़ना भी एक अहम काम रहेगा।
सुशांत सिंह राजपूत केस से कनेक्शन की भी जांच
दिशा सालियान का नाम सुशांत सिंह राजपूत से भी जुड़ा रहा है, क्योंकि वह कुछ समय तक उनकी मैनेजर थीं। सुशांत की मौत 14 जून 2020 को हुई थी, यानी दिशा की मौत के कुछ दिन बाद। इसी वजह से दोनों मामलों के बीच किसी संभावित कनेक्शन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। सीबीआई इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाएगी। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत की मौत की अलग जांच कर चुकी सीबीआई ने मार्च 2025 में मामले को बंद करते हुए किसी तरह की आपराधिक साजिश के सबूत नहीं मिलने की बात कही थी।
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अभी किसी को आरोपी नहीं बनाया गया
इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि सीबीआई की एफआईआर में कई लोगों से जुड़े आरोपों का उल्लेख होने के बावजूद अभी किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसी व्यक्ति को आरोपी तभी माना जाएगा, जब जांच अधिकारी को उसके खिलाफ उचित संदेह के पर्याप्त आधार मिलें। अब आगे गवाहों के बयान, मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री और पुराने पुलिस दस्तावेजों की जांच से यह तय होगा कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था और शुरुआती जांच में उठे सवालों के जवाब मिलते हैं या नहीं।