छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के बाद पति-पत्नि के फिर से साथ रहने के अरमानों पर रोक लगा दी है। बिलासपुर का यह मामला समाज में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक दंपत्ति ने आपसी सहमति से तलाक लेने के बाद एक बार फिर से साथ रहने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने यह फैसला सुनाकर दोनों के सपनों पर विराम लगा दिया। जानिए पूरा मामला और हाईकोर्ट का अहम फैसला।
तलाक के बाद फिर से साथ रहने की चाह
बिलासपुर जिले में एक दंपत्ति ने शादी के कुछ समय बाद वैवाहिक जीवन में दरार महसूस की और दोनों ने मिलकर फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। जनवरी 2025 में फैमिली कोर्ट ने दोनों की सहमति से तलाक मंजूर कर दिया। लेकिन तलाक के बाद दोनों के बीच दुबारा मेल-जोल बढ़ गया। उन्होंने साथ में मथुरा की यात्रा की और एक बार फिर से साथ रहने का मन बनाया। इसके लिए दोनों ने उच्च न्यायालय में पहले जारी तलाक के आदेश को निरस्त करने की याचिका दायर की।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच – जस्टिस रजनी दूबे और अमितेंद्र किशोर प्रसाद – ने यह फैसला सुनाया कि एक बार पारित तलाक की डिक्री के खिलाफ पुनः याचिका दायर नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून सिर्फ भावनाओं पर आधारित नहीं होता, बल्कि सबूत और प्रक्रियाओं के आधार पर चलता है। इसलिए दंपत्ति की याचिका को अस्वीकार कर दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम निर्णय पारित हो चुका है और उसके खिलाफ फिर से अपील का कोई स्थान नहीं है।
फैसले का सामाजिक प्रभाव
इस फैसले ने समाज में बड़ी चर्चा छेड़ दी है। बहुत से लोगों का मानना है कि पति-पत्नि के बीच भावनात्मक संबंध कभी खत्म नहीं होते। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है ताकि सामाजिक व्यवस्था और व्यवस्था बनाए रखी जा सके।