आपने तलाक को लेकर परिवारों में लात घूंसे और कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते हुए महिला के मायके वालों को देखा होगा, लेकिन शनिवार को कचहरी परिसर में एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसे देखने के लिए लोग रुक गए थे। मामला था तलाक होने का। बेटी का तलाक होने के बाद मायके वालों की खुशी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तलाक का फैसला आते ही कोर्ट के बाहर मायके खुशी से उछल पड़े और लोगों को मिठाई खिला कर खुशी का इजहार किया। इतना ही कचहरी परिसर से ही मायके वाले बेटी को बैंड बाजे के साथ घर ले गए। खास बात यह थी कि मायके वालों ने एक ही रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी, जिसे पर बेटी का फोटो बना हुआ था। पूरे दिन कचहरी में यह तलाक चर्चा का विषय बना रहा।
ससुराल वालों की मानसिकता नहीं बदली
बेटी की तलाक होने के बाद पिता रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया, बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर के मेजर गौरव अग्निहोत्री से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल वाले बेटी को प्रताड़ित करने लगे थे। इस दौरान बेटी ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद भी ससुराल वालों की मानसिकता नहीं बदली। आरोप था कि ससुराल वाले लगातार बेटी को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से परेशान कर रहे थे। बेटी को उम्मीद थी कि बेटा पैदा होने के बाद सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार बेटी ने तलाक लेने का फैसला किया और परिवार न्यायालय में तलाक के लिए याचिका दायर की। चार अप्रैल को कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तलाक मंजूर कर लिया। बेटी के तलाक का फैसला आते ही परिजन खुशी से झूम उठे और पूरे सम्मान के साथ बेटी का घर ले जाने के लिए पहले से ही व्यवस्था कर रखी थी। तलाके बाद परिवार के लोगों बेटी को माला पहनाकर स्वागत किया और मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया। परिवार के सभी सदस्यों ने एक जैसी कलर की टीशर्ट पहन रखी थी। टीशर्ट पर बैठी का फोटो बना हुआ था। कचहरी से परिवार के लोग ढोल नगाड़ों के साथ नाचते हुए बेटी को घर ले गए।
बेटी फाइनेंस डायरेक्टर है
प्रणिता शर्मा शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ जुडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वह इकलौती बेटी हैं। उनके भाई की साल 2022 में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। प्रणिता ने बताया,वह मानसिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी थीं, लेकिन परिवार हर समय उनके साथ खड़ा रहा। इसी सहारे उन्होंने खुद को संभाला। उन्होंने अन्य महिलाओं को संदेश दिया कि अगर आप किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो चुप न रहें। अपने पैरों पर खड़े होकर हक की लड़ाई लड़े। उसके बाद ही शादी की सोचें। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही असली सशक्तिकरण है।
पिता बोले, बेटी को खुशी देना उनका दायित्व था
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा, अगर बेटी शादी से दुखी थी, तो उसे खुशी देना पिता का दायित्व होता है। शादी के दौरान बेटी बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी। आज मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लेकर आया हूं। उन्होंने समाज को संदेश दिया कि बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का बराबर सदस्य मानना चाहिए। समाज में अब भी यह सोच है कि बेटी की डोली जाती है, तो अर्थी ही लौटनी चाहिए। इस सोच में थोड़ा बदलाव आया है, लेकिन असली बदलाव अभी बाकी है। उन्होंने कहा, बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है। बेटी परिवार का हिस्सा है। महिलाओं का सशक्तिकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसको जमीन पर उतारना जरूरी है।