Diwali 2025: प्रदोष और महानिशीथ काल — जानें कौन-सा समय किस पूजा के लिए सबसे शुभ है, कब करनी चाहिए लक्ष्मी साधना-दिवाली सिर्फ दीपों और सजावट का पर्व नहीं है, बल्कि यह वह क्षण है जब धरती पर दिव्य ऊर्जाओं का प्रवाह अपने चरम पर होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन दो विशेष काल बनते हैं — प्रदोष काल और महानिशीथ काल। जहां प्रदोष काल गृहस्थ भक्तों के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का समय माना जाता है, वहीं महानिशीथ काल तांत्रिक और साधक उपासकों के लिए अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली समय होता है। इस वर्ष दिवाली के दिन महानिशीथ काल मात्र दो घंटे का रहेगा, जो विशेष पूजा और साधना के लिए सबसे शुभ माना जा रहा है।
प्रदोष काल: गृहस्थों के लिए शुभ समय
धार्मिक गणनाओं के अनुसार, 20 अक्टूबर की शाम प्रदोष काल शाम 5:36 बजे से रात 8:07 बजे तक रहेगा। यह काल सूर्यास्त के कुछ देर बाद का समय होता है, जब वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। इस अवधि में गृहस्थों द्वारा लक्ष्मी-गणेश, कुबेर और सरस्वती की विधिवत पूजा की जाती है। दीप प्रज्वलित करने, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण के लिए भी यह समय अत्यंत अनुकूल होता है।
महानिशीथ काल: तंत्र साधना का दिव्य क्षण
इस वर्ष दिवाली रात महानिशीथ काल रात 11:45 बजे से 12:39 बजे तक रहेगा। यह वह अवधि है जब अमावस्या तिथि और मध्यरात्रि एक साथ पड़ती हैं। तंत्र शास्त्रों में इसे “सिद्धि काल” कहा गया है — यानी वह समय जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे तीव्र होती है। साधक इस समय मां महाकाली, भैरव और लक्ष्मी के विशेष मंत्रों का जाप करके अद्भुत साधनाएं करते हैं। यह काल केवल तांत्रिकों के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है।
क्यों खास है दिवाली की अमावस्या
दिवाली की रात अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। इसी दिन महालक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, इसलिए स्वच्छता, दीपदान और शांत मन से पूजा करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।