Maa Lakshmi Aarti Lyrics: दीपावली का त्योहार मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन घरों में विधि-विधान से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में धन-धान्य और खुशहाली बनी रहती है। पूजा को पूर्ण करने के लिए देवी की आरती उतारना और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना गया है। अगर आप भी इस दिवाली माता रानी की भक्ति में लीन होना चाहते हैं, तो यहां पढ़ें लक्ष्मी चालीसा और आरती के संपूर्ण बोल। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 8 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है। कार्तिक अमावस्या की इस पावन तिथि पर प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी की विधिवत उपासना करने से जीवन में आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। दिवाली की शाम पूजा के बाद मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करने के साथ उनकी चालीसा पढ़ना चाहिए। इसके बाद श्रद्धापूर्वक आरती करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें।
दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल का समय शाम 5 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। पूजा के बाद चालीसा और आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है।
मां लक्ष्मी चालीसा
दोहा
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥
सोरठा
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
चौपाई
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा । सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥
दोहा
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥
मां लक्ष्मी की आरती (Maa Lakshmi Aarti Lyrics)
दिवाली की पूजा में चालीसा पाठ के बाद माता लक्ष्मी की आरती करना न भूलें। यहां पढ़ें आरती के पूरे बोल।
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
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दिवाली पर पूजा के समय ध्यान रखें: मां लक्ष्मी की आराधना स्वच्छ स्थान पर करें। पूजा में दीपक, धूप, फूल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद पूरे परिवार के साथ चालीसा और आरती का पाठ करें। धार्मिक विश्वास के अनुसार, श्रद्धा और भक्तिभाव से की गई पूजा से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और परिवार के सदस्यों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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