Diwali Lakshmi Puja Vidhi: दीपावली का त्योहार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से पूजा करके माता लक्ष्मी से घर में सुख, शांति और धन-धान्य बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की पूजा में श्री सूक्त का पाठ करना भी बहुत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी को समर्पित श्री सूक्त के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। अगर आप भी इस दिवाली माता लक्ष्मी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो पूजा के दौरान श्री सूक्त का पाठ कर सकते हैं। आइए जानते हैं इसके पाठ से जुड़े नियम और सभी 16 मंत्र।
दिवाली के दिन श्री सूक्त का पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं। माता को लाल गुलाब, कमल या गुड़हल के फूल अर्पित करें। इसके बाद शांत मन से मंत्रों का जाप शुरू करें।
श्री सूक्त का पाठ करते समय दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इसका पाठ पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके करना शुभ माना जाता है। जाप के दौरान मन को इधर-उधर भटकने न दें और पूरी श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का ध्यान करें।अगर आपको संस्कृत के मंत्रों का सही उच्चारण करने में परेशानी होती है, तो पहले उनका अर्थ समझ लें और धीरे-धीरे स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें। नियमितता और श्रद्धा के साथ किया गया पाठ विशेष महत्व रखता है।
श्री सूक्त को मां लक्ष्मी की स्तुति का महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है। दीपावली की लक्ष्मी पूजा के समय इसके मंत्रों का पाठ किया जा सकता है। यहां जानिए श्री सूक्त के 16 मंत्र:
मंत्र 1
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥
मंत्र 2
ॐ तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥
मंत्र 3
ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम्।
श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम्॥
मंत्र 4
ॐ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
मंत्र 5
ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥
मंत्र 6
ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥
मंत्र 7
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे॥
मंत्र 8
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्॥
मंत्र 9
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
मंत्र 10
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि।
पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः॥
मंत्र 11
कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम।
श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
मंत्र 12
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे।
नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
मंत्र 13
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥
मंत्र 14
आर्द्रां यःकरिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्।
सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥
मंत्र 15
तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्॥
यह भी पढ़ें: 7 नवंबर 2026 पंचांग: छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी पर जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दीपदान का महत्व
मंत्र 16
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादा ज्यमन्वहम्।
सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री सूक्त मां लक्ष्मी की स्तुति का एक पवित्र माध्यम है। दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के साथ इसका पाठ करने से भक्त माता से धन, ऐश्वर्य, सुख और सौभाग्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
इसलिए दिवाली की पूजा में दीप प्रज्वलित करने और मां लक्ष्मी की आराधना के साथ श्री सूक्त का पाठ भी अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार शामिल कर सकते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।