Flight Ticket Price Hike : दिवाली से पहले हवाई सफर करने वालों की जेब पर बोझ बढ़ गया है। फेस्टिव सीजन में कई प्रमुख रूट पर फ्लाइट टिकट के दाम तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली से हैदराबाद जाने का औसत एकतरफा किराया पिछले साल के मुकाबले 68% तक बढ़ गया है। वहीं, मुंबई से कोलकाता के रूट पर 51% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यात्रियों को उम्मीद थी कि त्योहार खत्म होने के बाद टिकट सस्ते हो जाएंगे, लेकिन फिलहाल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। कुछ रूट पर यात्रियों की संख्या घटने से किराये में थोड़ी कमी जरूर आ सकती है।
इन रूट पर सबसे ज्यादा बढ़ा किराया
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच यात्रा के लिए औसत एकतरफा हवाई किराये की तुलना पिछले साल की समान अवधि से की गई। इसमें दिल्ली-हैदराबाद रूट पर 68%, मुंबई-कोलकाता पर 51%, दिल्ली-गोवा पर 39% और मुंबई-बेंगलुरु पर 37% की बढ़ोतरी सामने आई। इन आंकड़ों से साफ है कि त्योहारों के दौरान कई लोकप्रिय रूट पर सफर करना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। यात्रियों को टिकट बुक करते समय ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।
विमान ईंधन की कीमतों ने बढ़ाया बोझ
हवाई किराया बढ़ने की बड़ी वजह विमान ईंधन यानी एटीएफ की महंगी कीमतें हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर से घरेलू विमान ईंधन की कीमत में करीब 16 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई और इसकी कीमत लगभग 137 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के मुताबिक, अक्टूबर में घरेलू विमान ईंधन पिछले साल की तुलना में 46.2% महंगा था। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी करीब 30 से 40% होती है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से टिकटों के दाम पर भी असर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया का असर
डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी हवाई सफर महंगा होने की एक वजह है। एयरलाइंस के करीब 35 से 50% खर्च डॉलर में होते हैं। इनमें विमान किराया, ईंधन और रखरखाव जैसे खर्च शामिल हैं। रुपये की कीमत घटने पर इन सेवाओं के लिए कंपनियों को ज्यादा पैसा देना पड़ता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। कई उड़ानों को लंबे वैकल्पिक रास्तों से जाना पड़ता है। इससे खर्च बढ़ता है और कुछ मार्गों पर सीटों की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
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यात्रियों की संख्या घटने से कितनी राहत?
आईसीआरए के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या पिछले साल की तुलना में 1.9% घटी। वहीं, भारतीय एयरलाइंस से अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 19.3% की गिरावट आई। विमानन आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के बीच घरेलू उड़ानों का निर्धारित कार्यक्रम पिछले साल के मुकाबले 5% कम था और सीटों की उपलब्धता में 1.2% की कमी आई। त्योहारों के बाद यात्रियों की संख्या घटने पर कुछ रूट पर किराये कम हो सकते हैं, लेकिन बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल कम है।
सरकार के नए नियम क्या बदलेंगे?
केंद्र सरकार हवाई किराये में अचानक और मनमानी बढ़ोतरी पर निगरानी रखने के लिए नए नियम तैयार कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, एयरलाइंस को अपने किराये का ढांचा एक महीने पहले नागर विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए को देना होगा और अपनी वेबसाइट पर भी दिखाना होगा। डीजीसीए इन किरायों की निगरानी करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 16 नवंबर तक अंतिम नियम पेश करने को कहा है। हालांकि, इन नियमों का उद्देश्य किराये तय करना नहीं है। इसलिए इनके लागू होने से टिकट सस्ते होने की गारंटी नहीं है।