Diwali Gold Investment : भारत में दशहरा, दिवाली और शादी-ब्याह के दौरान सोना खरीदना लंबे समय से शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार ऊंची कीमतों ने ग्राहकों की खरीदारी की रणनीति बदल दी है। कई परिवार अपने बजट को पहले जैसा रखते हुए कम वजन के गहने खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग सोने के सिक्कों, बार और गोल्ड ETF में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिकॉर्ड स्तर से कीमतों में आई गिरावट के बाद खरीदारों के सामने सवाल है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है या कीमतें अभी और नीचे जा सकती हैं।
वैश्विक बाजार में सोने की हलचल
मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने इस बढ़त को सहारा दिया। स्पॉट गोल्ड 0.1 प्रतिशत बढ़कर 4,145.22 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स का भाव 4,164.70 डॉलर प्रति औंस रहा। यह तेजी जनवरी 2026 के रिकॉर्ड स्तर से 26 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद आई है। निवेशकों की नजर 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है, क्योंकि ब्याज दरों से जुड़े फैसले सोने की कीमतों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
ETF और डिजिटल गोल्ड में बढ़ी दिलचस्पी
सोने में निवेश के पारंपरिक तरीकों के साथ अब डिजिटल विकल्पों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में गोल्ड ETF में 2,596.70 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो जुलाई के 1,559 करोड़ रुपये से अधिक था। यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब इनमें सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया। ETF के तहत प्रबंधित सोने की मात्रा 121.3 टन और कुल परिसंपत्तियां करीब 1.91 लाख करोड़ रुपये बताई गईं। जून से अगस्त के बीच डिजिटल गोल्ड की खरीदारी औसतन 2,500 करोड़ रुपये प्रति माह रही। इसके उलट, अगस्त में भारत का सोना आयात घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जो जुलाई से 45 प्रतिशत कम था।
ये भी पढ़ें : एक हफ्ते में टमाटर के दाम 65% टूटे, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
कम वजन के गहनों पर दे रहे ध्यान
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की ऊंची कीमतों के कारण परिवार अपनी खरीदारी का तरीका बदल रहे हैं। त्योहारों की शुरुआत में 24 कैरेट सोना करीब 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। ऐसे में कई ग्राहक अपने बजट में बदलाव किए बिना कम वजन के आभूषण खरीद रहे हैं। निवेश के लिए सिक्कों, बार और ETF जैसे विकल्पों पर भी ध्यान बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीयों का सोने के प्रति पारंपरिक लगाव कायम है, लेकिन अब खरीदारी में आभूषणों के साथ संपत्ति सुरक्षित रखने की सोच भी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
दिवाली तक क्या बढ़ सकते हैं दाम
दिवाली तक सोने की कीमतों में तेजी आएगी या नहीं, यह कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगा। भारत में त्योहारों और शादियों की मांग कीमतों को सहारा दे सकती है। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, महंगाई के आंकड़े, डॉलर की चाल और सरकारी बॉन्ड की यील्ड अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर डालेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी लंबी अवधि में सोने को समर्थन दे सकती है, लेकिन निवेशकों की बिकवाली बढ़त को सीमित कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट सोने के लिए अनुकूल हो सकती है, जबकि सख्त मौद्रिक नीति कीमतों पर दबाव डाल सकती है। इसलिए हालिया गिरावट को लगातार तेजी का संकेत मानना उचित नहीं होगा।