
देशभर में दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. ये रात केवल दीपों और खुशियों की नहीं, बल्कि तंत्र साधना के लिए भी विशेष मानी जाती है.
हमारे बड़े-बुजुर्ग अक्सर हमसे कहते हैं कि चौराहा ना फांदना या वहां पर पड़ी कोई चीज ना उठाना. ये सब इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन अलौकिक और दैवीय शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, इसलिए इस रात को ‘तंत्र की महारात्रि’ भी कहा जाता है. इस दौरान कई तांत्रिक और तंत्र-मंत्र के साधक अपनी सिद्धि प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं लेकिन इन्हीं के बीच कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाले टोने-टोटके करते हैं. ऐसे में दिवाली की रात सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है.
गलियों, चौराहों और पीपल के नीचे होते हैं टोटके
दिवाली की रात को गलियों, चौराहों और पीपल के पेड़ों के नीचे विभिन्न तरह के टोटके किए जाते हैं. लोग अपनी इच्छाएं पूरी करने या परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए इन उपायों का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार इनके दुष्परिणाम दूसरों को भुगतने पड़ते हैं. इसलिए इस तरह की चीजों से दूर रहने में ही समझदारी होती है.
असाध्य रोगों से मुक्ति पाने को काले कपड़े का टोटका
कहा जाता है कि असाध्य बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए कुछ लोग दिवाली की रात काले कपड़े में दाल बांधकर उसे तेल में डुबोकर चौराहे पर रख देते हैं. ऐसा माना जाता है कि यह बीमारी को दूर करता है, लेकिन दरअसल यह किसी और के जीवन में नकारात्मक ऊर्जा फैला सकता है. इसलिए सड़क पर रखी काले कपड़े की पोटली को छूने या उसके पास जाने से बचना चाहिए.
इस दिन किसी को भी दही ना दें
दिवाली की रात को तंत्र साधना करने वाले कई लोग पड़ोसियों से दही मांगते हैं. ऐसा विश्वास है कि मांगा हुआ दही उनके घर में लगातार धन वृद्धि कराता है. इसलिए इस दिन किसी को भी दही न दें, क्योंकि यह आपके घर की बरकत को कम कर सकता है.
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चौराहे पर रखी मटकी को छूने से बचें
कभी-कभी लोग घर के क्लेश दूर करने के लिए मिट्टी के घड़े में जौ, सिक्के और ‘भैरव मुठिया’ रखकर चौराहे पर छोड़ देते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे परिवार में शांति आती है, लेकिन वास्तव में ये टोटके दूसरों के लिए अशुभ माने जाते हैं. इसलिए दिवाली के बाद कुछ दिनों तक सड़क या चौराहे पर रखी मटकी को छूने से बचें.
संतान की चाह में किए जाने वाले टोटके
इसके अलावा दिवाली की रात कई नि:संतान महिलाएं बच्चों वाले घरों की दहलीज पर आटे की लोई रख देती हैं या छोटे बच्चों को सफेद चीजें जैसे दही, खीर आदि खिला देती हैं. माना जाता है कि इससे उनकी संतान प्राप्ति होती है, लेकिन वास्तव में यह टोटका किसी और के सुख को अपने हिस्से में लेने का प्रयास माना जाता है.