मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मेडिकल साइंस के बीच आस्था और अंधविश्वास का अजीब संगम देखने को मिला। जब एक बीमार बच्चे पर डॉक्टर की दवाओं का असर नहीं हुआ, तो परिवारवालों ने अस्पताल परिसर को ही देवी का दरबार बना दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हो रहा है, जो कई सवाल खड़े करता है – एक ओर मेडिकल सुविधाओं की प्रभावशीलता और दूसरी ओर समाज में गहराई तक जड़े अंधविश्वास।
जब दवा नहीं बनी दुआ का सहारा
घटना शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की है, जहां बागौदा निवासी एक परिवार ने अपने 12 वर्षीय बीमार बेटे को इलाज के लिए भर्ती कराया था। लेकिन जब अस्पताल में इलाज के बावजूद बच्चे की तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हुआ, तो परिजनों ने इसे किसी बुरी शक्ति या जादू-टोना का असर मान लिया। उन्होंने मेडिकल साइंस को दरकिनार कर मां देवी का आह्वान करने का फैसला लिया।
अस्पताल बना आस्था का अखाड़ा
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे महिलाओं का एक समूह अस्पताल परिसर में देवी को बुलाने के लिए पूजा-अर्चना करता है। थोड़ी ही देर में एक महिला पर 'देवी सवार' हो जाती हैं और जादू-टोना होने की पुष्टि करती हैं। बच्चा के पिता देवी से मिन्नत करते हैं और दो बकरे चढ़ाने की बात कहते हैं, ताकि उनके बेटे की तबीयत में सुधार हो जाए।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़
घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। जहां कुछ लोग इसे अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच की हार बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे भावनात्मक मजबूरी मानकर परिवार की स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
मेडिकल सिस्टम पर भी उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और डॉक्टरों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब परिजन इलाज से संतुष्ट नहीं होते, तब वे ऐसे रास्तों की ओर क्यों बढ़ते हैं? क्या इसका कारण इलाज में भरोसे की कमी है या फिर हमारे समाज में अब भी अंधविश्वास की गहरी पकड़?
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