RO Water & Vitamin B12: आजकल लगभग हर भारतीय घर में पीने के पानी को साफ और सुरक्षित बनाने के लिए RO वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन ने RO के पानी और शरीर में विटामिन B12 की कमी के बीच एक चिंताजनक संबंध की ओर इशारा किया है।हाल के सालों में भारत में विटामिन बी12 की भारी कमी देखी जा रही है। इसी बात को समझने के लिए पश्चिमी भारत के डॉक्टरों ने एक बेहद दिलचस्प रिसर्च की। इस स्टडी ने हर किसी के कान खड़े कर दिए हैं।
250 लोगों पर किया गया रिसर्च
पश्चिम भारत में डॉक्टरों की एक टीम ने 250 लोगों पर एक रिसर्च की। इस अध्ययन में लोगों के खान-पान, डेयरी प्रोडक्ट्स के सेवन और पीने के पानी के स्रोत की जांच की गई। कुल 250 लोगों में से 70 लोगों में विटामिन बी12 की कमी दर्ज की गई है।
RO बनाम सामान्य पानी
RO का पानी पीने वाले लोगों में से 50.6% में B12 की कमी पाई गई। इसके विपरित, नल, बोरिंग या सामान्य फिल्टर का पानी पीने वालों में यह कमी केवल 17.5% लोगों में देखी गई।
क्या RO का पानी सीधे B12 की कमी पैदा करता है ?
इस सवाल का जवाब अभी स्पष्ट नहीं है. अध्ययन में केवल संबंध पाया गया, यह साबित नहीं हुआ कि RO का पानी सीधे Vitamin B12 की कमी का कारण बनता है। शोधकर्ताओं ने भी अपने निष्कर्ष में कहा कि इस संबंध की पुष्टि के लिए बड़े और लंबी अवधि वाले अध्ययनों की आवश्यकता है। पानी में खुद विटामिन बी 12 नहीं होता, यह मुख्य रूप से भोजन से मिलता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि RO पानी को साफ करने के चक्कर में पानी के उन प्राकृतिक तत्वों या सूक्ष्म जीवाणुओं को भी बाहर निकाल देता है, जो हमारे पेट के गुड बैक्टीरिया को मजबूत रखते हैं। जब पेट के अच्छे बैक्टीरिया कमजोर पड़ते हैं, तो शरीर भोजन से विटामिन बी 12 को सही तरीके से सोख नहीं पाता।
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विटामिन बी12 शरीर के लिए क्यों है जरूरी
लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करना
दिमाग और नसों को स्वस्थ रखना
शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखना और DNA का निर्माण करना
विटामिन बी12 की कमी के लक्षण
बिना वजह बहुत ज्यादा थकान और सुस्ती
हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन
चक्कर आना
छोटी-छोटी बातें भूलना
भूख कम लगना
मुंह में बार-बार छाले होना
किन लोगों को है ज्यादा खतरा
Vitamin B12 मुख्य रूप से दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मांस जैसे पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। इसलिए शुद्ध शाकाहारी लोगों, बुजुर्गों और पाचन से जुड़ी बीमारियों से पीड़िता मरीजों में इसकी कमी का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है।