Dogs Bite : कुत्ते का नाम सुनते ही ज़हन में वफादारी, सुरक्षा और इंसान के सबसे अच्छे दोस्त की छवि बनती है. लेकिन जब यही कुत्ता काट ले, तो यह गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. कई बार आपने सुना या देखा होगा कि कुत्ते के काटने के बाद व्यक्ति में अजीब व्यवहार, डर, चिल्लाना या पागलों जैसी हरकतें शुरू हो जाती हैं. दरअसल, यह कोई सामान्य घटना नहीं होती बल्कि यह रेबीज़ (Rabies) नामक जानलेवा संक्रमण का परिणाम होता है. इस लेख में जानिए कि कुत्ते के काटने से ऐसा क्यों होता है, इसके लक्षण क्या हैं, और सबसे जरूरी – इसका समय रहते इलाज क्या है.
क्यों करने लगता है इंसान अजीब हरकतें?
जब किसी संक्रमित कुत्ते द्वारा इंसान को काटा जाता है, तो उसके थूक (saliva) में मौजूद रेबीज़ वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है. यह वायरस धीरे-धीरे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (nervous system) को प्रभावित करता है और मस्तिष्क (brain) तक पहुंच जाता है. इसके बाद व्यक्ति के सोचने, समझने और व्यवहार करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है.
इसका असर जैसे-जैसे बढ़ता है, व्यक्ति अजीब तरह की हरकतें करने लगता है — जैसे पानी से डरना (Hydrophobia), हवा में हाथ-पैर मारना, बिना कारण डरना, चिल्लाना, किसी को नुकसान पहुंचाना, या खुद को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतें करना. इसे देखकर लोग इसे 'पागलपन' समझते हैं, जबकि यह रेबीज़ का न्यूरोलॉजिकल प्रभाव होता है.
रेबीज़ के लक्षण क्या होते हैं?
- बुखार, सिरदर्द, थकावट
- काटे गए स्थान पर जलन या दर्द
- पानी से डर लगना (Hydrophobia)
- रोशनी या तेज़ आवाज से घबराहट
- अत्यधिक चिड़चिड़ापन
- भ्रम, मतिभ्रम और आक्रामक व्यवहार
- मांसपेशियों में ऐंठन और लकवा
इन लक्षणों के दिखने के बाद अगर इलाज न हो तो यह बीमारी जानलेवा हो सकती है.
इलाज और बचाव:
1. कुत्ते के काटते ही क्या करें?
सबसे पहले घाव को तुरंत साबुन और पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं, घाव को साफ और खुला रखें, रगड़ें नहीं, तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं.
2. टीका (Anti-Rabies Vaccine) ज़रूरी है:
कुत्ते के काटने के बाद 0, 3, 7, 14 और 28 दिन के अंदर एंटी-रेबीज़ वैक्सीन लगवाना अनिवार्य होता है, अगर कुत्ता पालतू नहीं है या भाग गया है, तो वैक्सीन लेना ज़रूरी है चाहे उसके लक्षण दिखें या नहीं.
3. इम्युनोग्लोबुलिन (Rabies Immunoglobulin):
गहरे या खून बहने वाले घाव में यह इंजेक्शन भी लगाया जाता है जो वायरस को फैलने से रोकता है. कुत्ते के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि रेबीज़ एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज लक्षण आने के बाद लगभग असंभव हो जाता है. इसलिए सतर्कता, समय पर इलाज और टीकाकरण ही इसका सबसे बड़ा समाधान है. याद रखें – "काटने से नहीं, देर करने से जान जाती है.