
भारतीय ज्योतिषशास्त्र में नवग्रहों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। इनमें से एक है केतु, जिसे छाया ग्रह कहा जाता है। केतु का प्रभाव जीवन में मानसिक भ्रम, अस्थिरता, अचानक नुकसान, आत्मिक बेचैनी और बाधाओं के रूप में देखा जा सकता है। जिन जातकों की कुंडली में केतु अशुभ स्थान पर होता है या केतु दोष होता है, उनके लिए विशेष उपायों की सलाह दी जाती है। इन्हीं उपायों में से एक है कुत्तों की सेवा – और वह भी खासतौर पर तीन रंगों (त्रिवर्ण) के कुत्तों की।
कौन से होते हैं तीन रंगों के कुत्ते?
तीन रंगों वाले कुत्ते यानी जिनके शरीर पर काले, सफेद और भूरे या हल्के पीले रंग के बाल होते हैं। इस प्रकार के कुत्ते त्रिदोष निवारक माने जाते हैं और विशेष रूप से केतु के अशुभ प्रभाव को शांत करने वाले माने जाते हैं। इन्हें केतु का वाहन भी कहा गया है, इसलिए इनकी सेवा से केतु शांत होता है।
कुत्तों की सेवा क्यों है प्रभावशाली?
कुत्ते को हिन्दू धर्म में वफादारी, सुरक्षा और चेतना का प्रतीक माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार, कुत्ता भैरव बाबा का प्रिय है और भैरव को केतु से भी जोड़ा जाता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से कुत्तों को भोजन देता है, विशेषकर त्रिवर्ण कुत्तों को, उसकी कुंडली में केतु की स्थिति धीरे-धीरे अनुकूल होने लगती है। यह सेवा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि दयाभाव और करुणा से जुड़ी हुई होती है। जब आप निःस्वार्थ भाव से एक असहाय प्राणी की सेवा करते हैं, तो ब्रह्मांड आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भेजता है। यह बदलाव केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और व्यवहारिक रूप से भी असर दिखाता है।
कुत्तों की सेवा कैसे करें?
प्रतिदिन या सप्ताह में कुछ दिन सड़क पर रहने वाले कुत्तों को दूध, रोटी या बिस्किट दें।
विशेषकर शनिवार और मंगलवार को यह सेवा करने से अधिक फल मिलता है।
किसी घायल या बीमार कुत्ते की देखभाल करें।
कुत्तों को दुलार देना और उनकी रक्षा करना भी पुण्य का कार्य माना जाता है।