
अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप की वजह गरम हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करने का ऐलान कर दिया है. ऐसा ऐलान जो दुनिया के हर बड़े देश की धड़कनें बढ़ाने वाला है. ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अब चुप नहीं बैठेगा, क्योंकि रूस और चीन लगातार अपनी न्यूक्लियर क्षमता पर काम कर रहे हैं. ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास इतनी ताकत है कि दुनिया को 150 बार खत्म कर सकता है, लेकिन अगर दूसरे देश टेस्ट कर रहे हैं तो अमेरिका क्यों रुके? इस बयान ने ग्लोबल पावर बैलेंस को एक झटके में हिलाकर रख दिया.
दूसरे कर रहे, तो हम क्यों रुकें ?
ट्रंप ने कहा कि रूस और चीन खुले तौर पर टेस्ट नहीं दिखाते, लेकिन कर रहे हैं. वहीं उत्तर कोरिया भी लगातार मिसाइलें दागकर दुनिया को चैलेंज दे रहा है. ऐसे में अमेरिका का चुप रहना ट्रंप के मुताबिक कमजोरी होती. ट्रुथ सोशल पर पोस्ट डालकर उन्होंने रक्षा विभाग को तत्काल परमाणु परीक्षण शुरू करने का आदेश दे दिया. उन्होंने कहा हम दुनिया का अकेला देश नहीं बन सकते जो टेस्ट नहीं करता. ट्रंप के इस बयान के साथ ही दुनिया भर में चिंता की लहर दौड़ गई कि कहीं न्यूक्लियर रेस फिर से तेज न हो जाए.
रूस-चीन पर निशाना
ट्रंप ने यs भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी पुतिन और शी जिनपिंग से चर्चा की थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. उनका कहना है कि अगर दुनिया को परमाणु निरस्त्रीकरण चाहिए, तो सबको नियम मानने होंगे सिर्फ अमेरिका ही क्यों रुके? ये बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और रूस पहले ही सुपरपावर रेस में आमने-सामने हैं. ग्लोबल एक्सपर्ट्स की राय में ये फैसला दुनिया को फिर से उस दौर में धकेल सकता है जहां हर देश अपनी ताकत दिखाने में जुटा था.
दुनिया की चिंताएं बढ़ीं
ट्रंप का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बहुत बड़ा दांव माना जा रहा है. एक तरफ यह संदेश है कि अमेरिका अब पीछे नहीं हटेगा, दूसरी ओर खतरा यह भी है कि दूसरी महाशक्तियां भी अपने कार्यक्रम तेज कर दें. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन, रूस, चीन और संयुक्त राष्ट्र कैसे प्रतिक्रिया देते हैं