नई दिल्ली । लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में एनआईए की जांच ने एक बड़ा सुराग पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई विस्फोटक बनाने के लिए आटा चक्की और अन्य इलेक्ट्रिकल मशीनरी का इस्तेमाल करता था।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल यूरिया को पहले आटा चक्की में पीसता और फिर इलेक्ट्रिकल मशीन से रिफाइन करता था। इसके साथ ही वह विभिन्न केमिकल तैयार करता था। एनआईए ने इस संबंध में टैक्सी ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। ड्राइवर के अनुसार डॉ. मुजम्मिल ने उससे मशीनें अपने बहन के शादी के तोहफे के रूप में लाने को कहा और बाद में उन्हें धौज ले जाकर हॉस्टल के कमरा नंबर 15 में यूरिया पीसने के लिए इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसी को शक है कि इसी कमरे से 358 किलो विस्फोटक और आईईडी मटीरियल बरामद हुआ। फोरेंसिक लैब में भेजी गई आटा चक्की और इलेक्ट्रिकल मशीन से अमोनियम नाइट्रेट के अंश अलग किए जाएंगे।
टैक्सी ड्राइवर पलवल के असावटी का निवासी है और पिछले 20 साल से धौज गांव में अपनी बहन के यहां रहता है। वह सैनिक कॉलोनी में छोटे बच्चों के स्कूल के लिए कैब चलाता है। ड्राइवर ने बताया कि करीब 4 साल पहले उसके बेटे पर गर्म दूध गिरने से वह झुलस गया था और अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इसी दौरान वह डॉ. मुजम्मिल से संपर्क में आया और मुलाकातें होने लगीं।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल ने यूरिया पीसने के लिए ग्राइंडर का लगातार इस्तेमाल किया और बाद में अल-फलाह यूनिवर्सिटी से चोरी किए गए केमिकल को मिलाकर विस्फोटक तैयार किया गया। एनआईए की यह कार्रवाई विस्फोटक बनाने के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।