
भारतीय क्रिकेट टीम सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि बिज़नेस और ब्रांड वैल्यू के मामले में भी दुनिया की सबसे ताकतवर टीम मानी जाती है. टीम इंडिया की नीली जर्सी पर अपना नाम लिखवाने के लिए कंपनियां अरबों रुपये खर्च करने को तैयार रहती हैं. बीसीसीआई (BCCI) के साथ साझेदारी करने का मतलब होता है ब्रांड वैल्यू, पहचान और करोड़ों लोगों तक सीधी पहुंच. लेकिन हैरानी की बात है कि 2001 से लेकर अब तक टीम इंडिया के जर्सी स्पॉन्सर बनने वाली लगभग हर कंपनी को किसी न किसी वित्तीय या कानूनी संकट का सामना करना पड़ा है. अब इस लिस्ट में ड्रीम11 का नाम भी जुड़ गया है. वजह है हाल ही में संसद में पास हुआ ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन एंड प्रोमोशन बिल 2025 जिसमें सभी रियल-मनी गेमिंग ऐप्स पर बैन लगाने का प्रावधान है.
नया बिल और ड्रीम11 की मुश्किलें
भारत सरकार ने 21 अगस्त को ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 पास किया. इस बिल के अनुसार, कोई भी गेम या ऐप जिसमें असली पैसे लगाकर कमाई की उम्मीद हो (चाहे वह लक आधारित हो या स्किल आधारित) अब भारत में पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा. ड्रीम11 भले ही खुद को स्किल-आधारित फैंटेसी गेम बताता हो, लेकिन इसमें भी यूजर अपनी टीम बनाकर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पैसे लगाते हैं. इसलिए यह सीधा इस नए कानून के दायरे में आता है. बिल अब सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है. एक बार मंजूरी मिलते ही ड्रीम 11 सहित सभी रियल-मनी गेमिंग ऐप्स पर बैन लग जाएगा. इसका असर सीधे तौर पर ड्रीम11 की बिज़नेस स्ट्रेटजी और उसके बीसीसीआई के साथ हुए करोड़ों रुपये के जर्सी स्पॉन्सरशिप डील पर पड़ेगा.
टीम इंडिया की जर्सी पर "स्पॉन्सर्स का श्राप"?
ऐसा पहली बार नहीं है कि टीम इंडिया की जर्सी पर नाम आने के बाद किसी कंपनी के लिए मुश्किलें खड़ी हुई हों. पिछले दो दशकों में कई बड़े नाम इसी तरह संकट में घिर गए. आइए एक-एक कर समझते हैं-
सहारा: (2001–2013)
सहारा और भारतीय क्रिकेट टीम का रिश्ता सबसे लंबा और चर्चित रहा. लगभग 12 साल तक सहारा का लोगो टीम इंडिया की नीली जर्सी का हिस्सा रहा. 2003 विश्व कप का दिल तोड़ने वाला फाइनल और 2011 वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक जीत दोनों ही सहारा के साथ जुड़े रहे. लेकिन बाद में सहारा ग्रुप पर काले बादल छा गए. SEBI ने कंपनी पर नियामक उल्लंघनों का आरोप लगाया. लगभग 24,000 करोड़ रुपये 3 करोड़ निवेशकों से जुटाने के बाद कंपनी पर धोखाधड़ी और नियम तोड़ने के आरोप लगे. सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को जेल भेजा और तब से कंपनी का साम्राज्य लगभग ध्वस्त हो गया.
स्टार इंडिया: (2014–2017)
सहारा के बाद स्टार इंडिया टीम इंडिया का जर्सी स्पॉन्सर बना. यह दौर विराट कोहली, रोहित शर्मा और धोनी जैसे सितारों का था. लेकिन यहां भी किस्मत ने साथ नहीं दिया. स्टार इंडिया जो वॉल्ट डिज्नी के अधीन था उस पर मार्केट डॉमिनेशन और प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से जुड़ी जांचें शुरू हो गईं. कंपनी को भारी दबाव में अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म हॉटस्टार का जियो के साथ विलय करना पड़ा.
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ओप्पो: (2017–2020)
चीनी मोबाइल कंपनी ओप्पो ने 1079 करोड़ रुपये का मेगा डील किया. शुरुआत में कंपनी को उम्मीद थी कि क्रिकेट से उसकी ब्रांडिंग आसमान छू लेगी. लेकिन असलियत में हुआ उल्टा. पेटेंट विवाद, नोकिया और इंटरडिजिटल के साथ कानूनी झगड़े और कम रिटर्न के कारण ओप्पो को जल्दी ही यह डील छोड़नी पड़ी.
बायजूस: (2020–2022)
एडटेक यूनिकॉर्न बायजूस की एंट्री धमाकेदार रही. कंपनी का नाम टीम इंडिया की जर्सी पर आया और सबको लगा कि यह लंबे समय तक रहेगा. लेकिन कुछ ही सालों में बायजूस दिवालियापन की कगार पर पहुंच गया. लगातार घाटा, भुगतान में गड़बड़ी, टैक्स विवाद और निवेशकों के दबाव के कारण कंपनी का नाम डूबते हुए टाइटैनिक की तरह नीचे चला गया. बीसीसीआई ने भी 158 करोड़ रुपये के बकाए की वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया.
ड्रीम 11: (2023–2026 तक डील)
ड्रीम 11 ने 2023 में टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सरशिप संभाली. यह सौदा 2026 तक चलना था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. कंपनी पहले ही 1,200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के आरोपों में जांच का सामना कर चुकी है. हालांकि एक नोटिस वापस ले लिया गया था, लेकिन नए बिल के बाद फिर से उस पर खतरा मंडरा रहा है. अगर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ड्रीम11 पर प्रतिबंध लग जाता है, तो यह कंपनी भी उसी "पनौती लिस्ट" का हिस्सा बन जाएगी, जिसमें सहारा, स्टार इंडिया, ओप्पो और बायजूस पहले से शामिल हैं.
बीसीसीआई और स्पॉन्सर्स का रिश्ता: वरदान या अभिशाप?
बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. टीम इंडिया की जर्सी पर अपना नाम लिखवाना किसी भी ब्रांड के लिए "गोल्डन टिकट" जैसा है. करोड़ों लोग टीवी और मोबाइल पर हर मैच देखते हैं और जर्सी पर छपे लोगो को नोटिस करते हैं. लेकिन पिछले 20 सालों की कहानी बताती है कि यह डील जितनी आकर्षक दिखती है, उतनी ही खतरनाक साबित हुई है. हर कंपनी जिसने टीम इंडिया की जर्सी पर अपना नाम लगवाया, कुछ ही सालों में किसी न किसी कानूनी, वित्तीय या रेगुलेटरी मुश्किल में फंस गई. अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति की मंजूरी पर टिकी हैं. अगर ऑनलाइन गेमिंग बिल को मंजूरी मिल जाती है, तो ड्रीम11 का भविष्य अधर में लटक जाएगा. इसका असर सिर्फ कंपनी पर ही नहीं, बल्कि बीसीसीआई की स्पॉन्सरशिप स्ट्रेटजी पर भी पड़ेगा. बोर्ड को फिर से नए स्पॉन्सर की तलाश करनी पड़ सकती है.
टीम इंडिया की जर्सी सिर्फ गौरव और पहचान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन कंपनियों के लिए भी "आग का दरिया" साबित हुई है, जिन्होंने इस पर अपना नाम लिखवाया. सहारा से लेकर ड्रीम11 तक हर ब्रांड को भारी संकट झेलना पड़ा है. क्या यह सिर्फ संयोग है या वाकई टीम इंडिया की ब्लू जर्सी स्पॉन्सर्स के लिए 'पनौती' है? इसका जवाब वक्त ही देगा.