प्रयागराज। संगमनगरी में अपराध पर अंकुश लगाने और अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली विशेष अभियान समूह (एसओजी) की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा होने के बाद पुलिस कमिश्नरेट ने सख्त कदम उठाया है। प्रयागराज की पूरी एसओजी को भंग कर दिया गया है। पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया के इस फैसले से महकमे में खलबली मच गई है। चार अलग-अलग जोन में तैनात एसओजी के कुल 44 पुलिसकर्मियों को टीम से हटा दिया गया है।
आधिकारिक तौर पर एसओजी भंग किए जाने की वजह स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन पुलिस महकमे में इसकी कड़ी को मांडा में सामने आई ड्रग फैक्टरी से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाके में आबादी से दूर शेड बनाकर लंबे समय से नशीले पदार्थ तैयार किए जा रहे थे। इसका खुलासा स्थानीय पुलिस या एसओजी की सूचना पर नहीं, बल्कि मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद हुआ। ऐसे में जिले के खुफिया और सूचना तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रयागराज कमिश्नरेट में एसओजी की अलग-अलग टीमों में कुल 44 पुलिसकर्मी तैनात थे। इनमें सेंट्रल जोन के 11, नगर जोन के 14, गंगानगर के 10 और यमुनापार के नौ पुलिसकर्मी शामिल थे। टीम भंग होने के बाद इन पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और अन्य जिम्मेदारियों में भेजे जाने की संभावना है।
एसओजी का मूल काम जिले में सक्रिय अपराधियों, गिरोहों और संगठित अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं जुटाना और गंभीर मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद करना है। ऐसे में मांडा जैसे ग्रामीण इलाके में लंबे समय तक ड्रग फैक्टरी संचालित होने और इसकी भनक स्थानीय सूचना तंत्र को न लगने से एसओजी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
अब नए सिरे से बनेगी टीम
एसओजी को भंग करने के बाद अब इसे नए स्वरूप में गठित किए जाने की संभावना है। नई टीम में किन पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा और उसकी कार्यप्रणाली क्या होगी, इस पर जल्द निर्णय होने की चर्चा है। साथ ही मांडा ड्रग फैक्टरी प्रकरण में स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र की विफलता और संभावित लापरवाही की समीक्षा भी की जा सकती है।
मुंबई क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद सामने आए इस मामले ने प्रयागराज पुलिस की अपराध रोकथाम व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। अब निगाह इस बात पर है कि नए सिरे से गठित होने वाली एसओजी किस तरह सूचना तंत्र को मजबूत करती है और संगठित अपराध पर शिकंजा कसने में कितनी प्रभावी साबित होती है।