नए साल 2026 के जश्न से पहले नशे के सौदागरों ने युवाओं को निशाने पर ले लिया था। ठीक उसी तरह जैसे अवैध तरीके से विदेश जाने के लिए ‘डंकी रूट’ का इस्तेमाल होता है, वैसे ही ड्रग तस्करों ने भी तीन राज्यों में फैला एक गुप्त नेटवर्क तैयार किया। मध्यप्रदेश एसटीएफ की कार्रवाई ने इस साजिश का पर्दाफाश कर दिया, जिसमें करोड़ों की नशीली खेप जब्त की गई।
नए साल को ‘बिजनेस सीजन’ मान रहे तस्कर
जैसे-जैसे साल 2025 खत्म होने की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे नशे के कारोबारी सक्रिय हो गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि नए साल के जश्न को देखते हुए गांजा, ड्रग्स और नशीली सिरप की बड़ी खेप पहले से ही डंपिंग स्टेशनों तक पहुंचा दी जाती है। इसके बाद छोटे पैडलरों के जरिए इन्हें शहरों और कस्बों में खपाया जाता है।
599 किलो गांजा और बड़ा खुलासा
मध्यप्रदेश एसटीएफ ने अनूपपुर के जंगलों में कार्रवाई कर ट्रक से 599 किलो गांजा बरामद किया, जिसकी बाजार कीमत करीब 1.80 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस मामले में सीधी और सतना के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि यह खेप नए साल में सप्लाई के लिए लाई जा रही थी।
गांजा, ड्रग्स और सिरप के तय ‘डंकी रूट’
जांच में सामने आया है कि गांजे की सप्लाई ओडिशा से शुरू होकर छत्तीसगढ़ होते हुए मध्यप्रदेश तक पहुंचती है। वहीं ड्रग्स की तस्करी नीमच से इंदौर-भोपाल बेल्ट तक फैली हुई है। नशीली सिरप के लिए रीवा को ट्रांजिट हब बनाया गया है, जहां से पूरे विंध्य क्षेत्र में सप्लाई होती है।
छोटे पैडलरों पर टिकी पूरी सप्लाई चेन
तस्कर पहले बड़ी खेप सुरक्षित इलाकों में डंप करते हैं। इसके बाद छोटे पैडलर बाइक, कार या बसों के जरिए नशे की खेप को अलग-अलग जिलों में पहुंचाते हैं, ताकि एक जगह पकड़ होने पर पूरा नेटवर्क उजागर न हो।
पुलिस की बढ़ी नजर
नए साल से पहले सीमावर्ती जिलों में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि ‘डंकी रूट’ जैसे गुप्त रास्तों को चिन्हित कर लगातार कार्रवाई की जाएगी।