ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार गुरु (बृहस्पति) के अस्त होने से मांगलिक कार्यों पर 145 दिनों का विराम लग गया है। हिन्दू धर्म में गुरु को विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है। जब गुरु अस्त होते हैं, तो इन कार्यों को रोक दिया जाता है क्योंकि यह काल शुभ नहीं माना जाता। इस बार गुरु 4 जून 2025 को अस्त हुए हैं और अब 27 अक्टूबर 2025 को उदय होंगे। यानी इस अवधि में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य जैसे शादी, मुंडन, यज्ञोपवीत, गृह प्रवेश आदि वर्जित माने जाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु अस्त होने का अर्थ है कि उनकी शुभ ऊर्जा धरती पर नहीं पहुंच रही है, जिससे मांगलिक कार्यों की सफलता पर प्रभाव पड़ता है।
बृहस्पति सूर्य के अत्यधिक आ जाते हैं नजदीक
गुरु का अस्त होना एक खगोलीय प्रक्रिया है, जिसमें बृहस्पति सूर्य के अत्यधिक नजदीक आ जाते हैं और पृथ्वी से उनका प्रकाश दिखाई नहीं देता। ज्योतिष में यह स्थिति "अस्त" कहलाती है। इसी कारण धार्मिक कार्यों में इसे अशुभ काल माना जाता है। हालांकि इस अवधि में आवश्यक पारिवारिक या सामाजिक कार्यों को सीमित रूप से किया जा सकता है, लेकिन विवाह जैसे बड़े आयोजनों को टालने की सलाह दी जाती है। गुरु के उदय होते ही पुनः विवाह-शादी के मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे और चारों ओर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी।
जानें कब बजेगी शहनाई
27 अक्टूबर 2025 को जैसे ही गुरु उदय होंगे, पंचांग के अनुसार कई शुभ मुहूर्त सामने आएंगे। नवंबर और दिसंबर में विशेष रूप से विवाह के लिए उत्तम तिथियां होंगी, जिससे विवाह सीजन की रौनक लौटेगी। इस बीच, पंडितों और ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस अवधि में आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य, और पारिवारिक समरसता पर ध्यान दिया जाए ताकि गुरु के उदय होते ही घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का संचार हो सके।