Durva Vinayak Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। सावन महीने में आने वाली इस चतुर्थी को दूर्वा विनायक चतुर्थी, दूर्वा गणपति व्रत या दूर्वा गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करने और उन्हें दूर्वा चढ़ाने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना करने से जीवन की परेशानियां दूर होने और घर में सुख-शांति आने की कामना की जाती है। आइए जानते हैं इस व्रत की तिथि, पूजा का सही समय और पूजा करने का तरीका।
कब है दूर्वा विनायक चतुर्थी?
पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे शुरू हुई थी। इसका समापन 16 अगस्त की शाम 4:52 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर दूर्वा विनायक चतुर्थी का व्रत आज यानी 16 अगस्त को रखा जाएगा।
विनायक चतुर्थी पर पूजा के लिए शुभ समय
दूर्वा विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने के लिए सुबह 11:06 बजे से दोपहर 1:44 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में श्रद्धालु गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
दूर्वा गणेश चतुर्थी पर कैसे करें पूजा?
व्रत रखने वाले लोग सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके वहां भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। गणेश जी को सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद उन्हें दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं। भगवान को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद धूप और दीप जलाकर गणपति बप्पा की पूजा करें। पूजा के दौरान गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। अंत में गणेश जी की आरती करें और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और सफलता के लिए प्रार्थना करें।
गणेश जी के इन मंत्रों का करें जाप
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दंती प्रचोदयात्॥
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।