Aparajita Puja 2026: दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की विजय का उत्सव मनाने के साथ देवी अपराजिता की आराधना करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इस पूजा को जीत, साहस और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक माना गया है। कहा जाता है कि लंकापति रावण के साथ युद्ध में जाने से पहले भगवान राम ने देवी अपराजिता की उपासना की थी। ऐसे में विजयादशमी पर इस पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में अपराजिता पूजा का शुभ समय क्या रहेगा और इसे किस तरह किया जा सकता है। विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान राम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की याद दिलाता है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे पर रावण दहन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस दिन देवी अपराजिता की पूजा भी की जाती है। मान्यता है कि माता की आराधना से व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता पाने और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिलता है।
कौन हैं देवी अपराजिता और क्यों होती है इनकी पूजा?
अपराजिता का अर्थ है ऐसी शक्ति जिसे पराजित न किया जा सके। धार्मिक परंपराओं में देवी अपराजिता को शक्ति स्वरूपा देवी के रूप में पूजा जाता है। कुछ मान्यताओं में उनका संबंध मां दुर्गा और देवी वैष्णवी से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण के विरुद्ध युद्ध में विजय की कामना से देवी की आराधना की थी। इसी मान्यता के चलते दशहरे पर अपराजिता पूजा को विशेष स्थान प्राप्त है। भक्त इस दिन माता से अपने जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपने प्रयासों में सफलता पाने की प्रार्थना करते हैं।
अपराजिता पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
विजयादशमी के दिन अपराजिता पूजा के लिए अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय देवी की उपासना करना शुभ रहता है। बताए गए मुहूर्त के अनुसार, पूजा का समय दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 2 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग में समय की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
दशहरे पर इस विधि से करें अपराजिता पूजा
1. पूजा की तैयारी करें: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और पूजा की आवश्यक सामग्री एक जगह रख लें।
2. चौकी स्थापित करें: एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर देवी अपराजिता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
3. माता को पूजन सामग्री चढ़ाएं: शुभ समय में देवी को रोली, चंदन और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद पुष्प चढ़ाकर धूप और दीप प्रज्वलित करें।
4. फल और मिठाई का भोग लगाएं: माता के सामने फल और मिठाई रखें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं।
5. प्रार्थना करके पूजा पूरी करें: देवी का ध्यान करें और उनसे अपने कार्यों में सफलता, साहस तथा जीवन की कठिनाइयों से उबरने की शक्ति देने की प्रार्थना करें। अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें।
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अपराजिता पूजा करने से क्या लाभ मिलने की मान्यता है?
धार्मिक विश्वास के अनुसार, दशहरे पर देवी अपराजिता की पूजा करने से व्यक्ति को विजय और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। कई लोग किसी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत, चुनौतियों का सामना करने या अपने प्रयासों में कामयाबी की कामना के साथ यह पूजा करते हैं। कुछ मान्यताओं में इसे विरोधियों पर विजय और कानूनी मामलों में अनुकूल परिणाम की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।